नकारात्मक स्वप्नों से मुक्त कैसे हैं
आयुर्वेद और आधुनिक मनो विज्ञान यह मानता है कि सपने हमारी शारीरिक स्थिति और न्यूरो-केमिकल्स का परिणाम हैं, लेकिन भारतीय दर्शन और योग शास्त्र इस सत्य को एक कदम और गहराई में ले जाते हैं। जब हम शरीर और रसायनों की परत से नीचे उतरते हैं, तो अवचेतन मन की अनंत गहराइयों में हमें ‘संस्कार’ और ‘संचित कर्मों’ का भंडार मिलता है।
सपने केवल इस जीवन के आहार और विचारों का ही ‘लूप’ नहीं हैं, बल्कि यह उन जन्म-जन्मांतरों के कार्मिक संबंधों और स्मृतियों की प्रतिध्वनि हैं, जो हमारे ‘चित्त’ में गहराई से दर्ज है।
चित्त की हार्ड ड्राइव में पूर्व जन्म के संस्कार हमें वृत्ति की आवेग के कारण जाग्रत अवस्था में दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन निद्रा की अवस्था में जब बाहरी दुनिया के कोलाहल से दूर हो जाते हैं, तब हमारा अवचेतन मन जाग्रत होता है।
इस तरह यह अवचेतन मन उस ‘लूप’ का हिस्सा है, जो सिर्फ इस जन्म की नहीं, बल्कि पिछले कई जन्मों की अपूर्ण इच्छाओं, आघातों और कार्मिक ऋणों का स्वप्न में प्रगट डेटाबेस है।
अक्सर हमें ऐसे सपने आते हैं जिनमें हम ऐसी जगहों पर होते हैं जहां हम कभी नहीं गए, या ऐसे चेहरों को देखते हैं जिनसे हम इस जीवन में कभी नहीं मिले। वास्तविकता में, यह सब कोरी कल्पनाएं नहीं होतीं, बल्कि पूर्व जन्म के कार्मिक संबंध होते हैं, जिनका हिसाब अभी चुकता होना बाकी है।
कार्मिक सपनों को कैसे पहचानें?
अकारण भय के सपने: बार-बार ऊंचाई से गिरने, पानी में डूबने या किसी विशेष जीव से डरने के सपने अक्सर पूर्व जन्म की अंतिम स्मृतियों या आघातों का संकेत होते हैं।
सपनों में किसी अजनबी के प्रति अत्यधिक प्रेम, क्रोध या अपराधबोध महसूस करना यह दर्शाता है कि उस आत्मा के साथ आपका कोई पुराना ऋणानुबंध जुड़ा हुआ है।
बार-बार दोहराए जाने वाले सपने जब कोई कर्म या पाठ अधूरा रह जाता है, तो प्रकृति उसे तब तक सपनों के माध्यम से हमारे सामने लाती है, जब तक कि हम उस कार्मिक लूप को समझ कर उसे सुलझा नहीं लेते।
नकारात्मक स्वप्नों से मुक्त कैसे हैं
डाइट और स्वप्न का सीधा संबंध है। जब हम सात्विक आहार लेते हैं, तो हमारे शरीर के रसायन संतुलित होते हैं और नाड़ियां शुद्ध होती हैं। इस शारीरिक शुद्धि से ‘प्रज्ञा’ (उच्च स्तरीय बुद्धिमत्ता) जाग्रत होती है। जब मन का दर्पण सात्विक आहार और सही जीवनशैली से साफ हो जाता है, तब सपने डराने वाले नहीं रहते। तब वह ब्रह्मांड और हमारी आत्मा के बीच संवाद का माध्यम बन जाते हैं।
सार यह है कि शारीरिक और मानसिक बीमारियों को पकड़ने के साथ-साथ, सपने हमारी आत्मा की विकास यात्रा का भी चार्ट हैं। अपने आहार को शुद्ध करके और साक्षी भाव से इन सपनों का अवलोकन करके, हम न केवल वर्तमान जीवन की बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि जन्मों पुराने कार्मिक लूप को तोड़कर आत्म-मुक्ति की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।
यदि आप भी नकारात्मक स्वप्नों से परेशान हैं तो एक बार शैव ग्राम आकर अपने स्मृति की संस्कार शोधन का अभ्यास जरुर कीजिये ! यह संस्कार चिकित्सा का अभ्यास आपके सम्पूर्ण जीवन को बदल देगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
मोबाईल : 9453092553

