वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तथाकथित ‘धर्म’ प्रायः रूढ़ियों, कर्मकांडों और विवेकहीन अंधे अनुकरण का पर्याय बन गया है। जहाँ तर्क और विश्लेषण समाप्त हो गया है, अब बस सिर्फ अंधविश्वास और भय बचा है।
इसी सैद्धांतिक यथार्थ को गहराई से समझते हुए, शैव ग्राम में किसी पारंपरिक ‘धर्म’ या सांप्रदायिक कर्मकांड की शिक्षा नहीं दी जाती।
इसके स्थान पर, यहाँ भगवान शिव द्वारा प्रतिपादित शाश्वत ‘शैव जीवन शैली’ और वैज्ञानिक जीवन प्रबंधन को यथार्थ रूप में जिया जाता है।
शिव का दर्शन अन्य धर्म पंथों की तरह कोई संकीर्ण पंथ नहीं, यह मानवीय चेतना और प्रकृति के सह-अस्तित्व का सर्वोच्च विज्ञान है।
शैव ग्राम इस सत्य पर आधारित है कि शिव की वास्तविक आराधना केवल मंत्र रटना नहीं है, बल्कि ‘इंद्रिय जय तप’ और ‘अपरिग्रह’ के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में उतारना है।
जब धर्म एक संस्था बन जाता है, तो वह मनुष्य को बाहरी व्यवस्थाओं का गुलाम बनना पड़ता है। इसके विपरीत जब साधक शिव की जीवनशैली अपनाता है, तब वह मनुष्य को आत्मनिर्भर, निर्भय और प्रकृति की जैविक लय के साथ जोड़ देता है।
शैव ग्राम में अंधविश्वास का स्थान ‘प्रज्ञा बोध’ अर्थात विश्लेषणात्मक तर्क और सत्य ने ले लिया है। यहाँ जैविक अन्न उगाना, सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर होना और मूक जीवों का संरक्षण करना ही यथार्थ शिव-साधना है।
शैव ग्राम मनुष्य को किसी काल्पनिक स्वर्ग के भ्रम में नहीं डालता बल्कि यह व्यक्ति को यही पृथ्वी पर साक्षात् स्वर्ग की अनुभूति करवाता है !
लेकिन यह ईश्वरीय सुख धर्म का अँधा अनुकरण करने वाले के भाग्य में नहीं है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
शैव ज्ञान के लिये संस्थान की कक्षा से जुड़िये
मोबाईल : 9453092553

