किसी भी आध्यात्मिक ग्राम या संस्थान से जुड़ने से पहले उसके मूल सिद्धांतों को समझना अति आवश्यक है। इसलिए यह सुझाव है कि पहले ‘गुरुदेव श्री योगेश कुमार मिश्रा जी’ के मार्गदर्शन में भगवान शिव के ‘शैव जीवन दर्शन’ को गहराई से जानिये।
फिर यदि आपकी वृत्ति (स्वभाव) से वह दर्शन मेल खाता है, तब ही उस संगठन या विचार धारा से जुड़िये ! आध्यात्मिक प्रगति तभी संभव है, जब उस संस्थान का दर्शन और आपकी अपनी स्वाभाविक वृत्ति आपस में सामंजस्य रखती हो। यदि शैव जीवन दर्शन आपके अंतर्मन, विचारों और जीवनशैली के अनुकूल है, तभी यहाँ आपकी सदस्यता सार्थक और फलदायी होगी।
यदि आपकी आंतरिक वृत्ति इस जीवन दर्शन से मेल नहीं खाती है, तो आपको निराश होने के बजाय अपनी प्रवृत्ति के अनुसार किसी अन्य उपयुक्त संस्था में प्रयास करना चाहिए।
मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि अंधानुकरण या किसी आवेगी निर्णय के कारण बिना सोचे-समझे किसी के पीछे चलने से बचना चाहिये ! सबसे पहले समय निकाल कर धैर्य से संस्थान के दर्शन को समझिये, स्वयं के लिए सबसे सटीक आध्यात्मिक मार्ग चुनिये इसके बाद ही वहां की सदस्यता लेनी चाहिये !
और जब सदस्यता ले लीजिये तब जीवन भर उसे निभाईये ! यह मेरी एक अत्यंत व्यावहारिक, स्पष्ट और परिपक्व सलाह है।!
शिवम शुक्ला
जनसम्पर्क प्रभारी, शैव ग्राम
संपर्क : – 63933 30597
