ज्योतिष में विवाह और वैवाहिक जीवन का विचार मुख्य रूप से कुंडली के सप्तम भाव, सप्तमेश (सप्तम भाव का स्वामी), और विवाह के कारक ग्रह, पुरुष के लिए शुक्र और स्त्री के लिए बृहस्पति से विचार किया जाता है।
जब इन घटकों पर क्रूर या पापी ग्रहों का प्रभाव अत्यधिक हो जाता है, तो वैवाहिक जीवन में अलगाव या तलाक जैसी स्थितियां बनती हैं।
इसके अलावा यदि सप्तम भाव के ठीक पहले छठे भाव में और ठीक बाद आठवें भाव में पापी ग्रह जैसे शनि, राहु, या मंगल बैठ जाते हैं, तब सप्तम भाव में “पाप कर्तरी योग” बन जाता है। इससे वैवाहिक जीवन में घुटने होने लगती है। जो घुटन प्राय: तलाक तक पहुँच जाती है !
इसके अलावा यदि सूर्य और शनि की युति या दृष्टि सप्तम भाव या सप्तमेश पर हो, तो अहंकार (सूर्य) और नीरसता या लंबा खिंचाव (शनि) के कारण रिश्ता टूट जाता है।
ऐसे ही अन्य भी बहुत से योगों के कारण तलाक हो जाता है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553

