शरीर और चेतना का प्रथम मिलन बिंदु है लग्न, और लग्नेश का बल ही मनुष्य को आपदा से निकालकर उसके वास्तविक उदय का मार्ग प्रशस्त करता है।
वैदिक ज्योतिष में ‘लग्न’ का अर्थ है मनुष्य का अपना शरीर, उसका स्वभाव, उसकी मूल प्रवृत्ति और इस संसार में उसका अस्तित्व। और इस लग्न का जो स्वामी ग्रह होता है, उसे ‘लग्नेश’ कहा जाता है। संपूर्ण जन्म कुण्डली एक विराट साम्राज्य के समान है और लग्नेश उस साम्राज्य का सर्वशक्तिमान राजा है। यदि राजा बलवान और दिशा-संपन्न है, तो कुण्डली के अन्य ग्रह (प्रजा) चाहे कितने भी विपरीत क्यों न हों, मनुष्य अपने पुरुषार्थ और अदम्य साहस से हर विपत्ति को परास्त कर देता है।
लग्नेश मनुष्य के भीतर छिपी उस मूल शक्ति का प्रतीक है, जो उसे भीड़ से अलग करती है। आज के युग में जहाँ बाज़ारवाद, कृत्रिम उपभोक्तावाद और यंत्रों की दासता ने मनुष्य की स्वतंत्र चेतना को कुंठित कर दिया है, वहां एक बलिष्ठ लग्नेश मनुष्य को स्वावलंबन का मार्ग दिखाता है। ऐसा व्यक्ति बाह्य आवरण और दिखावे से प्रभावित नहीं होता। वह जानता है कि आधुनिकता की अंधी दौड़ और पारंपरिक, रटने वाली स्कूली शिक्षा उसे केवल व्यवस्था का एक पुर्जा बना सकती है, एक स्वतंत्र विचारक नहीं।
जिसका लग्नेश जागृत है, वह व्यक्ति अपनी जड़ों की ओर लौटता है। वह शून्य लागत वाली प्राकृतिक जीवनशैली अपनाता है, जहाँ प्रकृति का दोहन नहीं, बल्कि उसके साथ सह-अस्तित्व होता है। वह समझता है कि सच्चा सुख और स्वास्थ्य कंक्रीट के जंगलों में नहीं, बल्कि मिट्टी की सौंधी महक और फलदार वृक्षों की छांव में है। लग्नेश ही वह कंपास (दिशा-सूचक) है जो हमें भटकाव से बचाता है और यह बोध कराता है कि हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हमारा अपना शरीर और हमारी अपनी निर्मल बुद्धि है।
अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिये कुछ अभ्यास करने चाहिये, जैसे
लग्नेश को बलवान करने का सबसे प्रथम उपाय अपने शरीर को प्रकृति के पंचतत्वों के अनुकूल बनाना है। कृत्रिम वातानुकूलित और कंक्रीट के स्थानों का त्याग कर, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित भवनों में निवास का अभ्यास करें। अपने आस-पास 50 या उससे अधिक प्रजातियों के फलदार वृक्षों का सघन वन तैयार करें, ताकि विलुप्त होते पक्षियों और वन्य जीवों को आश्रय मिल सके। यह निस्वार्थ सेवा लग्नेश को अजेय बल प्रदान करती है।
दूसरा आपका शरीर ही लग्न है, अतः इसकी शुद्धि सर्वोपरि है। तामसिक और बाज़ारू भोजन का पूर्णतः त्याग करें। नित्य भोजन में अपरिष्कृत (बिना पॉलिश वाले) चावल, लौकी, तरोई, मूंग की दाल और शुद्ध देशी घी का उपयोग करें। यह आहार स्नायु तंत्र को शीतलता देता है। शरीर पर सदैव खादी अथवा सूती (प्राकृतिक धागों) से बने वस्त्र ही धारण करें, जिससे शरीर की ऊर्जा का बाह्य वातावरण के साथ सहज आदान-प्रदान हो सके।
तीसरा आभासी संचार माध्यमों (जैसे इंटरनेट के मंचों) पर चल रहे निरर्थक कोलाहल से अपनी ऊर्जा को बचाएं। जो लोग आपके जीवन में महत्व रखते हैं, उनसे आमने-सामने बैठकर सीधा संवाद करें। युवाओं को रटा-रटाया ज्ञान देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और स्वतंत्र विचारक बनने की शिक्षा दें। अपने दैनिक जीवन में पुरुषार्थ को ही अपनी गीता मानकर उसका पालन करें।
विस्तृत उपसंहार:
लग्नेश की शक्ति केवल भाग्य के भरोसे बैठे रहने में नहीं है, अपितु कठोर पुरुषार्थ और जीवन के प्रबंधन में निहित है। जब मनुष्य अपने लग्नेश की प्रकृति को समझकर अपने आहार, विचार और व्यवहार को उसके अनुकूल ढाल लेता है, तब वह किसी बाह्य सत्ता का मोहताज नहीं रहता। वह स्वयं अपने भीतर एक ऐसे स्वावलंबी तंत्र का निर्माण कर लेता है, जिसे कोई भी आर्थिक या सामाजिक संकट भेद नहीं सकता।
यह अध्याय इस शाश्वत सत्य को उद्घाटित करता है कि मनुष्य का वास्तविक उदय तभी संभव है जब वह स्वयं की चेतना को पहचान ले। जब हम प्रकृति से कटते हैं, तो हमारा लग्नेश निर्बल हो जाता है और हम रोगों तथा मानसिक तनावों से घिर जाते हैं। इसके विपरीत, जब हम पूर्णतः प्राकृतिक और शून्य लागत जीवनशैली को आत्मसात करते हैं, तब हम एक राज-ऋषि की भांति जीवन व्यतीत करते हैं।
लग्नेश को साधना ही स्वयं के अस्तित्व को साधना है। यही वह शक्ति है जो हमें एक साधारण मनुष्य से उठाकर एक युग-प्रवर्तक विचारक बना सकती है, जो न केवल अपना, बल्कि संपूर्ण समाज का मार्गदर्शन करने में सक्षम हो।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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गुरुदेव योगेश कुमार मिश्र की फोटो और नाम के साथ 1280 × 1000 पिक्सेल में कम से कम शब्दों में एक चित्र बनाइये जिसमें गुरुदेव सफ़ेद चमकदार कुर्ता पैजामा पहने हैं गले में पीला पट्टा डाले है उसमें ॐ नम: शिवाय लिखा है वह मंच पर खड़े होकर अपने शैव ग्राम के सभागार में बहुत से शिष्यों को प्रवचन दे रहे हैं ! हाल पूरा भरा हुआ है ! ऊपर से स्पेस देते हुये बड़े शब्दों में हेडिंग रहेगी ‘आपके जीवन का दिशा-सूचक ग्रह’ फोटो में गुरुदेव का एक ही चित्र प्रयोग कीजिये नाम के साथ कोई फोटो मत लगिए ! फोटो में उचित स्थान पर एक गोले के अन्दर लिखिये ज्योतिष श्रंखला – 4 संपर्क 9453092553

