जिस मनुष्य के भीतर उद्यम का अदम्य साहस और विचार की निर्मलता एक साथ जन्म लेते हैं, वही अपने पुरुषार्थ से समाज का सच्चा उदय करता है।
वैदिक ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस, भूमि और पराक्रम का कारक माना गया है, जबकि बुध प्रज्ञा, कौशल और संवाद का अधिपति है। जब जन्म कुण्डली के केंद्र भावों (1, 4, 7, 10) में मंगल अपनी स्वराशि या उच्च राशि में विराजमान होता है, तब ‘रुचक योग’ का निर्माण होता है। इसी प्रकार, जब बुध केंद्र में अपनी स्वराशि या उच्च राशि में होता है, तब ‘भद्र योग’ बनता है। ये दोनों योग ‘पंच महापुरुष योग’ की श्रेणी में आते हैं, जो साधारण मनुष्य को असाधारण कर्मयोगी बना देते हैं।
रुचक योग मनुष्य को ‘भूमि पुत्र’ बनाता है। इसका वास्तविक अर्थ किसी युद्ध के मैदान में लड़ना नहीं है, बल्कि आधुनिक व्यवस्था की पराधीनता से लड़कर एक स्वावलंबी जीवन का निर्माण करना है। जिसके जीवन में यह योग सक्रिय होता है, वह वातानुकूलित कमरों में बैठकर आदेश देने के बजाय, चिलचिलाती धूप में उतरकर स्वयं अपने हाथों से मिट्टी और गारे से भवनों का निर्माण करता है। वह शून्य लागत प्राकृतिक कृषि का प्रणेता बनता है।
वहीं दूसरी ओर, भद्र योग मनुष्य को ऐसी तीक्ष्ण बुद्धि देता है जो आभासी संचार माध्यमों के भ्रामक जाल में कभी नहीं उलझती। ऐसा व्यक्ति रटने वाली पारंपरिक शिक्षा का विरोध करता है और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा देता है।
जब किसी व्यक्ति के भीतर रुचक का साहस और भद्र की प्रज्ञा मिल जाती है, तो वह केवल अपने लिए नहीं जीता। वह संपूर्ण भारत और विश्व के कल्याण की दृष्टि से सोचता है। वह प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने के बजाय, वन्य जीवों और पक्षियों के लिए एक ऐसा प्राकृतिक परिवेश तैयार करता है, जहाँ मनुष्य और प्रकृति सह-अस्तित्व में रह सकें।
अपने सामर्थ को बढ़ाने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को कुछ अदभुत अभ्यास करने चाहिये !
पहला – मंगल (रुचक योग) को जाग्रत करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय भूमि से जुड़ना है। अपने हाथों से मिट्टी और चूने का प्रयोग कर प्राकृतिक आवास बनाएं। बंजर या खाली पड़ी भूमि पर 50 से अधिक प्रजातियों के फलदार वृक्षों का ऐसा सघन वन तैयार करें, जो पक्षियों और वन्य जीवों का आश्रय स्थल बन सके। यह निस्वार्थ शारीरिक श्रम आपके भीतर असीम ऊर्जा का संचार करेगा।
दूसरा – बुध (भद्र योग) को बलवान करने के लिए अपने ज्ञान को कागजों तक सीमित न रखें। युवाओं के लिए 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण जैसे प्रकल्प चलाएं, जहाँ उन्हें स्वावलंबन, प्राकृतिक जीवनशैली और जीवन प्रबंधन की प्रायोगिक शिक्षा दी जाए। आभासी दुनिया के शोर से दूर रहकर उनके साथ सीधा और प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करें।
तीसरा – शरीर की ऊर्जा (मंगल) और स्नायु तंत्र (बुध) को संतुलित रखने के लिए सदा सूती, खादी या लिनन जैसे प्राकृतिक धागों से बने वस्त्र ही पहनें। भोजन में तामसिक पदार्थों का पूर्णतः त्याग कर अपरिष्कृत चावल, तरोई, मूंग की दाल और शुद्ध देशी घी को शामिल करें। यह साधारण और प्राकृतिक आहार शरीर में अनावश्यक उत्तेजना को शांत कर विचार को कुंदन सा निखार देता है।
पंच महापुरुष योग इस बात का जीवंत प्रमाण है कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है। यह योग हमें यह सिखाता है कि सच्चा महापुरुष वह नहीं है जो सत्ता या बाज़ार के ऊंचे शिखर पर बैठा हो, बल्कि वह है जो अपनी जड़ों से जुड़ा हो।
आधुनिकता की अंधी दौड़ में जहाँ मनुष्य यंत्रों का दास बन गया है, वहां रुचक और भद्र योग हमें पुनः अपनी मिट्टी, अपने जल और अपने वनों की ओर लौटने का आह्वान करते हैं।
इस योग को सिद्ध करने का मार्ग अत्यंत स्पष्ट है, स्वयं पर निर्भर रहना और अपने पुरुषार्थ से जीवन की गीता लिखना। जब हम अपनी ऊर्जा को व्यर्थ के विवादों से निकालकर शून्य लागत प्राकृतिक जीवन, वन्य जीव संरक्षण और युवाओं के चारित्रिक निर्माण में लगाते हैं, तब हम वस्तुतः एक ‘राज-ऋषि’ की अवस्था को प्राप्त कर लेते हैं। जीवन की किसी भी बड़ी विपदा को परास्त कर नए सवेरे का उदय करना ही इस योग का परम उद्देश्य है।
गुरुदेव का यह वकतव्य प्रत्येक मनुष्य को यह प्रेरणा देता है कि वह अपनी असीम शक्तियों को पहचाने और एक स्वतंत्र, निर्भय तथा प्रज्ञावान विचारक के रूप में समाज का पथ प्रदर्शन करे।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
गुरुदेव योगेश कुमार मिश्र की फोटो और नाम के साथ 1280 × 1000 पिक्सेल में कम से कम शब्दों में एक चित्र बनाइये जिसमें गुरुदेव लाल कुर्ता सफ़ेद पैजामा पहने हैं गले में सफ़ेद पट्टा डाले है उसमें ॐ नम: शिवाय लिखा है वह मंच पर खड़े होकर अपने शैव ग्राम के सभागार में बहुत से शिष्यों को प्रवचन दे रहे हैं ! हाल पूरा भरा हुआ है ! ऊपर से स्पेस देते हुये बड़े शब्दों में हेडिंग रहेगी ‘अदम्य साहस और प्रज्ञा का चरम उत्कर्षीय ग्रह योग’ फोटो में गुरुदेव का एक ही चित्र प्रयोग कीजिये नाम के साथ कोई फोटो मत लगिए ! फोटो में उचित स्थान पर एक गोले के अन्दर लिखिये ज्योतिष श्रंखला – 5 संपर्क 9453092553

