आत्मविश्वास जगाने में ग्रहों की भूमिका

आत्म-विश्वास किसी बाज़ार में बिकने वाली कृत्रिम वस्तु नहीं है, बल्कि यह सूर्य के सत्य और मंगल के पुरुषार्थ से जाग्रत होने वाली वह प्रखर अग्नि है जो मनुष्य को जीवन के हर समर में अजेय बनाती है।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जगत की आत्मा, सत्य, स्वाभिमान और नैसर्गिक नेतृत्व का एकमात्र स्रोत माना गया है। वहीं मंगल को अदम्य साहस, शारीरिक ऊर्जा, भूमि और पराक्रम का अधिपति कहा जाता है। जब किसी मनुष्य के भीतर सूर्य का सत्य और मंगल का पुरुषार्थ एक साथ जाग्रत होते हैं, तब उसके भीतर ऐसा अजेय आत्मविश्वास जन्म लेता है जिसे संसार की कोई भी विपत्ति डिगा नहीं सकती।

आधुनिक काल की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज की कृत्रिम शिक्षा प्रणाली और पश्चिमी उपभोक्तावादी बाज़ार व्यवस्था ने मनुष्य के स्वाभाविक आत्मविश्वास को कुंठित कर दिया है। आज के युवा को यह सिखाया जाता है कि उसका मूल्य उसके द्वारा अर्जित कागजी मुद्रा या बाज़ार की वस्तुओं से है।

परंतु एक स्वतंत्र विचारक की दृष्टि में यह सबसे बड़ा भ्रम है। सच्चा आत्मविश्वास तब नहीं आता जब आप किसी बड़ी संस्था के दास बनते हैं, बल्कि तब आता है जब आप शून्य लागत पर अपना जीवन जीने में पूर्णतः सक्षम होते हैं।

जिस मनुष्य का सूर्य और मंगल बली है, वह वातानुकूलित कक्षों में बैठकर जीवन नहीं बिताता। वह चिलचिलाती धूप में उतरकर अपने हाथों से मिट्टी और गारे से अपने आवास का निर्माण करता है। वह भूमि (मंगल) का सम्मान करता है और सूर्य के प्रकाश में अपने पसीने से धरती को सींचता है।

वह जानता है कि जब तक वह स्वयं पर निर्भर है, तब तक कोई भी आर्थिक या सामाजिक संकट उसका पतन नहीं कर सकता। अपनी हर भयानक आपदा से अपने उदय का मार्ग प्रशस्त करना ही सूर्य और मंगल की सच्ची उपासना है।

इसके लिये हर व्यक्ति को यह तीन क्रियाएं अवश्य करनी चाहिये !

पहला  मंगल ‘भूमि पुत्र’ है, अतः इसे जाग्रत करने के लिए भूमि से सीधे जुड़ें। मात्र कागजी योजनाओं में न उलझें, अपितु खाली या ग्रामीण भूमि पर 50 से अधिक प्रजातियों के फलदार वृक्षों का ऐसा सघन वन तैयार करें जो वन्य जीवों और पक्षियों का प्राकृतिक आश्रय बने। मिट्टी से भवन निर्माण का कौशल सीखें। यह प्रत्यक्ष शारीरिक श्रम आपके भीतर मंगल के अदम्य साहस को जाग्रत करेगा और आपको पूर्ण स्वावलंबी बनाएगा।

दूसरा सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने के लिए नित्य सूर्योदय से पूर्व उठें। आभासी संचार माध्यमों के उस शोरगुल और सतही बहसों से स्वयं को सर्वथा दूर रखें जो केवल आपके स्वाभिमान और मानसिक ऊर्जा को खोखला करते हैं। इसके स्थान पर, युवाओं और समाज के साथ आमने-सामने बैठकर सीधा संवाद करें। सीधा संवाद आपके भीतर सूर्य के समान प्रखर नेतृत्व, वैचारिक स्पष्टता और सत्यवादिता को जन्म देता है।

और तीसरा शरीर की ऊर्जा को बाह्य वातावरण के अनुकूल रखने के लिए सदैव सूती, खादी या लिनन जैसे प्राकृतिक धागों के वस्त्र ही धारण करें। कृत्रिम धागे ऊर्जा के प्राकृतिक प्रवाह को रोकते हैं। भोजन में अपरिष्कृत (बिना पॉलिश वाले) चावल, तरोई, लौकी, मूंग की दाल और शुद्ध देशी घी का ही उपयोग करें। यह सात्विक आहार शरीर में मंगल की उत्तेजना को शांत कर उसे सूर्य के निर्मल तेज में परिवर्तित कर देता है।

सूर्य और मंगल मात्र आकाश में विचरने वाले ग्रह नहीं हैं, अपितु यह मनुष्य की चेतना की वह सर्वोच्च अवस्थाएं हैं जो उसे स्वावलंबन का सच्चा मार्ग दिखाती हैं। यह अध्याय समाज को यह संदेश देता है कि यदि हम अपनी युवा पीढ़ी में वास्तविक आत्मविश्वास जगाना चाहते हैं, तो उन्हें किताबी ज्ञान और आभासी दुनिया के भ्रम से बाहर निकालना ही होगा। उन्हें जीवन के प्रायोगिक कौशल और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व सिखाना होगा।

जब मनुष्य स्वयं अपने हाथों से प्रकृति को संवारता है, बिना किसी बाह्य निर्भरता के शून्य लागत प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाता है, तब वह किसी भी व्यवस्था का दास नहीं रहता। वह स्वयं अपने आप में एक पूर्ण व्यवस्था बन जाता है। अपने भीतर के सूर्य को पहचान कर और मंगल के कठोर पुरुषार्थ से जीवन की रणभूमि में उतरकर ही मनुष्य सही अर्थों में एक ‘राज-ऋषि’ बनता है।

आत्मविश्वास कोई केवल मानसिक धारणा नहीं है, बल्कि यह आपके द्वारा प्रकृति के सानिध्य में बहाए गए पसीने और आपके द्वारा चुने गए सत्य के मार्ग का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रमाण है।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

गुरुदेव योगेश कुमार मिश्र की फोटो और नाम के साथ 1280 × 1000 पिक्सेल में कम से कम शब्दों में एक चित्र बनाइये जिसमें गुरुदेव लाल कुर्ता पैजामा पहने हैं गले में सुनेहरा पट्टा डाले है उसमें लाल रंग से ॐ नम: शिवाय लिखा है वह मंच पर खड़े होकर अपने शैव ग्राम के सभागार में बहुत से शिष्यों को प्रवचन दे रहे हैं ! हाल पूरा भरा हुआ है ! ऊपर से स्पेस देते हुये बड़े शब्दों में हेडिंग रहेगी ‘आत्मविश्वास जगाने में ग्रहों की भूमिका’ फोटो में गुरुदेव का एक ही चित्र प्रयोग कीजिये नाम के साथ कोई फोटो मत लगिए ! फोटो में उचित स्थान पर एक गोले के अन्दर लिखिये ज्योतिष श्रंखला – 8  संपर्क 9453092553

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