मानसिक उलझनें बाह्य परिस्थितियों का नहीं, अपितु मनुष्य के अपनी जड़ों और प्रकृति से अलगाव का परिणाम हैं, मिट्टी की ओर लौटना ही मन की सबसे बड़ी चिकित्सा है।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और संवेदनाओं का, तथा बुध को बुद्धि और स्नायु तंत्र का अधिपति माना गया है। इसके विपरीत राहु उस कृत्रिमता, भ्रम और अंतहीन शोर का प्रतीक है जो मनुष्य को यथार्थ से दूर ले जाता है। जब जन्म कुण्डली में राहु का प्रभाव चंद्रमा या बुध पर पड़ता है, तो मनुष्य मानसिक उलझनों, अवसाद और भटकाव का शिकार हो जाता है।
आधुनिक युग की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज की संपूर्ण व्यवस्था ही राहु-प्रधान हो गई है। आभासी संचार माध्यमों का कोलाहल, बाज़ार की मृगतृष्णा और कृत्रिम जीवनशैली मनुष्य के स्नायु तंत्र को निरंतर उत्तेजित रखते हैं, जिससे उसकी सोचने-समझने की नैसर्गिक क्षमता कुंठित हो जाती है।
मनोविज्ञान में जिसे ‘विकासवादी विसंगति’ कहा जाता है, ज्योतिष उसे राहु का भ्रम कहता है। मनुष्य का शरीर और मन वातानुकूलित कक्षों, कंक्रीट के जंगलों और आभासी पर्दों के लिए नहीं बना है। जब हम अपनी मूल प्रकृति के विरुद्ध जाकर इन कृत्रिम साधनों के दास बन जाते हैं, तो हमारा मन एक पिंजरे में बंद पक्षी की भांति छटपटाने लगता है। यही छटपटाहट और घुटन ही मानसिक उलझन या तनाव है।
एक स्वतंत्र विचारक यह भली-भांति जानता है कि इन उलझनों का समाधान बाज़ार की किसी औषधि या किसी महंगे रत्न में नहीं है। इसका एक मात्र समाधान है ‘आत्म-निरीक्षण और प्रकृति की ओर वापसी’।
जब मनुष्य अपनी चेतना के प्रति सजग होकर, व्यर्थ के विचारों का साक्षी भाव से अवलोकन करना सीख जाता है, तब उसके भीतर से हर प्रकार का भ्रम मिट जाता है। मानसिक शांति कोई ऐसी वस्तु नहीं जिसे बाहर से खरीदा जा सके, यह तो शून्य लागत पर प्राकृतिक जीवन जीने और स्वयं के पुरुषार्थ से निर्मित होने वाली एक पवित्र अवस्था है।
मानसिक शांति के लिये हर व्यक्ति को यह तीन उपाये अवश्य करने चाहिये !
पहला राहु के भ्रम जाल को काटने का सबसे अचूक अस्त्र है आभासी संचार माध्यमों से पूर्णतः दूरी बनाना। अपने दिनचर्या में कुछ समय पूर्ण मौन के लिए निकालें, जहाँ आप अपने ही विचारों को बिना किसी पूर्वाग्रह के मात्र एक साक्षी की भांति देखें।
इसके अतिरिक्त, अपनी उलझनों को सुलझाने के लिए यंत्रों का नहीं, बल्कि ज्ञानी और अनुभवी व्यक्तियों के साथ आमने-सामने बैठकर सीधे संवाद का आश्रय लें। यह सीधा संवाद विचारों को स्पष्टता और स्नायु तंत्र को असीम विश्राम देता है।
दूसरा मन (चंद्रमा) की अस्थिरता को रोकने के लिए शरीर (मंगल/शनि) को मिट्टी से जोड़ना अनिवार्य है। किसी 10 एकड़ जैसे विस्तृत ग्रामीण भूभाग पर जाएं और वहां शून्य लागत प्राकृतिक कृषि तथा 50 से अधिक प्रजातियों के फलदार वृक्षों का ऐसा वन तैयार करने में श्रमदान करें, जो वन्य जीवों का आश्रय बन सके।
मिट्टी, गारे और चूने से बने प्राकृतिक आवासों में समय व्यतीत करें। धरती का स्पर्श शरीर की सारी नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव को सोख लेता है।
तीसरा आपका भोजन और वस्त्र आपके विचारों को सीधे प्रभावित करते हैं। शरीर को श्वास लेने दें, इसलिए सदैव सूती, खादी या लिनन के प्राकृतिक वस्त्र ही धारण करें। मानसिक उत्तेजना को शांत करने के लिए भोजन में तामसिक पदार्थों को पूर्णतः हटा दें।
नित्य अपरिष्कृत (बिना पॉलिश वाले) प्राकृतिक चावल, तरोई, लौकी, मूंग की दाल और शुद्ध देशी घी का ही सेवन करें। यह सात्विक आहार शरीर में शीतलता लाता है और मन को एकाग्र करता है।
मानसिक उलझनें वास्तव में कोई रोग नहीं हैं, बल्कि यह प्रकृति द्वारा दिया गया एक संकेत हैं कि हम अपने मूल मार्ग से भटक गए हैं। जब मनुष्य आधुनिक व्यवस्था की अंधी दौड़ का हिस्सा बन जाता है और अपनी क्षमताओं का मूल्यांकन बाज़ार के पैमानों पर करने लगता है, तब वह अपनी ही बुनी हुई मानसिक बेड़ियों में जकड़ जाता है।
यह अध्याय हमें यह शाश्वत ज्ञान देता है कि विपदा चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह हमारे उदय का ही एक कारण होती है। जब हम अपनी चेतना को जागृत कर लेते हैं और अपने जीवन को पूर्ण रूप से प्रकृति के नियमों के अधीन कर देते हैं, तब हम हर प्रकार के तनाव से मुक्त हो जाते हैं।
स्वावलंबन, शून्य लागत प्राकृतिक जीवन और स्वयं के पुरुषार्थ पर अटूट विश्वास, यही वह ज्योतिषीय और मनोवैज्ञानिक मार्ग है जो मनुष्य को एक साधारण, तनावग्रस्त व्यक्ति से उठाकर एक शांत, स्थिर और प्रज्ञावान ‘राज-ऋषि’ के रूप में स्थापित करता है। अपनी जड़ों की ओर लौटना ही जीवन का सबसे बड़ा और सबसे सफल प्रबंधन है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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मोबाईल : 9453092553
गुरुदेव योगेश कुमार मिश्र की फोटो और नाम के साथ 1280 × 1000 पिक्सेल में कम से कम शब्दों में एक चित्र बनाइये जिसमें गुरुदेव हरा चमकदार कुर्ता सफ़ेद पैजामा पहने हैं गले में सफ़ेद पट्टा डाले है उसमें लाल रंग से ॐ नम: शिवाय लिखा है वह मंच पर खड़े होकर अपने शैव ग्राम के सभागार में बहुत से शिष्यों को प्रवचन दे रहे हैं ! हाल पूरा भरा हुआ है ! ऊपर से स्पेस देते हुये बड़े शब्दों में हेडिंग रहेगी ‘मानसिक शांति के लिये ग्रह योग’ फोटो में गुरुदेव का एक ही चित्र प्रयोग कीजिये नाम के साथ कोई फोटो मत लगिए ! फोटो में उचित स्थान पर एक गोले के अन्दर लिखिये ज्योतिष श्रंखला – 9 संपर्क 9453092553

