
हर मनुष्य के भीतर एक नाद बजता है ,मुक्ति के लिये भीतर के नाद सुनना चाहिए । Yogesh Mishra
मुक्ति के लिये भीतर के नाद को सुनो 108 प्रधान उपनिषदों में से नाद-बिंदु एक उपनिषद…

मुक्ति के लिये भीतर के नाद को सुनो 108 प्रधान उपनिषदों में से नाद-बिंदु एक उपनिषद…

मृत्यु का पूर्वाभास कई लोगोँ को मृत्यु पूर्वाभास होता हैँ। पराविज्ञान के अनुसार मृत्यु से पहले…

ज्योतिषः सत्य या कल्पना आज भारत सहित विश्व भर के भविष्य को लेकर भारी जिज्ञासा है।…

मंत्र से रोग कैसे ठीक होते हैं ? पदार्थ जगत में विस्फोट होता है ऊर्जा की…

बृ्हस्पति, शुक्र के अस्तकाल में विवाहादि शुभ कार्य क्यों वर्जित है बृहस्पति और शुक्र के अस्त…

मारकेश का अर्थ मृत्यु नहीं है मारकेश का तात्पर्य कभी यह नहीं है कि व्यक्ति की…

मित्रो शनि का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगो को लगने लगता की बस अब तो सब…

सुदर्शन चक्र ज्योतिष का मूल आधार है। आत्मा मन तथा शरीर का सही समायोजन जीवन की…

भारतीय काल गणना की विकास यात्रा प्रकृति की जिन निश्चित घटनाओं से मनुष्य का आरंभ…