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जानिए । कालसर्प दोष से किस प्रकार की रूकावटें आती है और हानियाँ होती है । Yogesh Mishra

कालसर्प दोष से हानियां कालसर्प एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या शाप के फलस्वरूप उसकी जन्मकुंडली में परिलक्षित होता है। जिसके परिणाम स्वरूप जातक को अनेक प्रकार कि समस्याओं कासामना करना पडता है। जिस जातक की जन्मकुंडली में कालसर्प दोष होता है उसे विभिन्न दुख, कष्ट एवं परेशानीयों का सामना करना पडताहै।   जातकके भाग्योदय में अनेक प्रकार की रूकावटें आती है। जातककी प्रगति नहीं होती। जातकको प्रत्येक कार्य में असफलता मिलती है। जातकको जीविका चलाने का साधन नहीं मिलता यदि मिलता है तो उसे अनेक समस्याओं का सामना करना पडता है। जातकको पैतृक धन-संपप्ति से लाभ नहीं होता। जातकको शिक्षा में बाधा, स्मरण शक्ति का ह्नास होता है। उसकी शिक्षा प्रायः अधूरी रहती है। जातकका विवाह नहीं हो पाता। वैवाहिक संबंध टूट जाते है। जातकके घर संतान पैदा नहीं होती, यदि होती भी है तोे जीवित नहीं रहती। जातकके घर पुत्र संतान उत्पन्न नहीं होती या अनेक पुत्रियां होती है। जातककी संतान भी कुबुद्धि और उद्दंडी होती है। जातककी संतान वृद्धावस्था में अलग हो जाती है अथवा दूर चली जाती है। जातकका वैवाहिक जीवन कलहपूर्ण होता है। जातककी पत्नि अज्ञानी, मूर्ख, कामुक, अल्पज्ञ तथा अविश्वासी होती है। जातकअपने मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा के लिए निरंतर संघर्ष करता रहता है, फिर भी अपयश, आलोचना, उपेक्षा आदि से घिरा रहताहै।…

जानिए । भूत-प्रेत बाधा और पीड़ा क्या है ? क्या कहते है वेद ? Yogesh Mishra

भूत-प्रेत पीड़ा भूत-प्रेत संबंधित धारणा प्राचीन काल से जुड़ी है। चार वेदों में, बताया जाता है कि अथर्ववेद में जादू-टोनों और औषधि से संबंधित रहस्य हैं। इस ग्रंथ में वर्णित अनेक अनुष्ठान भूतों और दुष्ट आत्माओं को भगाने से संबंधित हैं। भूत-प्रेत के…

जानिए हमारे पूर्वज क्यों पहनते थे खड़ाऊ ? क्या है इसका वैज्ञानिक महत्व । Yogesh Mishra

क्यों पहनते थे खड़ाऊ ? पुरातन समय में हमारे पूर्वज पैरों में लकड़ी के खड़ाऊ (चप्पल) पहनते थे। पैरों में लकड़ी के खड़ाऊ पहनने के पीछे भी हमारे पूर्वजों की सोच पूर्णत: वैज्ञानिक थी। गुरुत्वाकर्षण का जो सिद्धांत वैज्ञानिकों ने…

जानिए । गीता जयंती – मोक्षदा एकादशी का क्या महत्व है ? क्या हुआ था इस दिन । Yogesh Mishra

ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो भगवद्गीता का उपदेश दिया था, वह युद्ध के दसवें दिन भीष्म पितामह के पतन के बाद संजय द्वारा कौरव की…

भारतीय ज्योतिष से जानिए , आप कितने धनवान होंगे ? Yogesh Mishra

क्या आप बनेंगे करोड़पति धन कमाना पुरुषार्थ का विषय है लेकिन उसका उपभोग करना प्रारब्ध का विषय है जन्मकुंडली में 12 (बारह) खाने होते हैं, जिन्हें ‘भाव’ कहा जाता है। इसमें पांचवें घर को फणकर, त्रिकोण तथा पंचम भाव कहा…

सदैव मंगल दोष के उपाय की जरूरत नहीं । जानिए मंगल दोष किन स्थितियों में स्वतः शांत हो जाता हैं । Yogesh Mishra

मंगल दोष किन स्थितियों में स्वतः शांत हो जाता हैं ९७% मांगलिक दोष स्वतः में भंग होते हैं, पर मंगल दोष किन स्थितियों में स्वतः शांत या कम हो जाता हैं। उनमें से कुछ निम्न हैं :- 1: दूसरी कुंडली…

बुल्गारिया मे 7000 वर्ष प्राचीन स्वास्तिक चिन्ह मिले हैं| पढ़िये स्वास्तिक का महत्व । Yogesh Mishra

स्वस्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में मंगल-प्रतीक माना जाता रहा है। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले स्वस्तिक चिह्व अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से बना है। ‘सु’ का अर्थ…

जानिए शंख के कितने प्रकारों का वर्णन शास्त्रों मे है और इनका इतिहास । Yogesh Mishra

शंख कई प्रकार के होते हैं और सभी प्रकारों शंखों की विशेषता एवं पूजन-पद्धति भिन्न-भिन्न है। उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका एवं भारत में पाये जाते हैं। शंख की आकृति (उदर) के…

राहु – केतु पर एक विशिष्ठ बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण शोध लेख । जरूर पढ़ें । Yogesh Mishra

राहु – केतु पर एक विशिष्ठ शोध लेख । राहु और केतु को ग्रह माना गया है लेकिन ये आकाश मंडल में दिखाई नहीं देते हैं। ये सूर्य, चंद्रमा व मंगल आदि ग्रहों की तरह दृश्यमान ग्रह नहीं हैं। दूसरे…

जानिए । रत्नों को धारण करने से संबंधित कौन-कौन सी गलत धारणाएं फैली हुई है । Yogesh Mishra

रत्नों धारण करने से संबंधित गलत धारणाएं दुनिया भर में लोगों के द्वारा रत्न धारण करने का प्रचलन बहुत पुराना है तथा प्राचीन समयों से ही दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोग इनके प्रभाव के बारे में जानने…