तंत्र की पंचमकार विकृत साधना ही बौद्धों के पतन का कारण है : Yogesh Mishra

प्राय: मूर्ख तांत्रिकों द्वारा पंचमकार को बिना समझे बुझे हुये उसकी बड़ी जोर शोर से पैरवी की जाती है !

जबकि पंचमकार का अर्थ है, पञ्च तत्वों को नियंत्रित करने का विज्ञान ! जिसमे पांच “म” शब्द से शुरू होने वाले अवयव आते हैं ! मांस-मदिरा-मत्स्य-मुद्रा और मैथुन !

कौलावली निर्णय में यह मत दिया गया है कि मैथुन से बढ़कर कोई भी तत्व् नहीं है ! इससे साधक सिद्ध हो जाता है, जबकि केवल मद्य से साधक मात्र भैरव ही रह जाता है, मांस से ब्रह्म, मत्स्य से महाभैरव और मुद्रा से साधकों में श्रेष्ठ हो जाता है ! केवल मैथुन से ही तांत्रिक सर्वसिद्ध प्राप्त कर सकता है !

तंत्र के 112 पध्यतियों में मात्र 2 पध्यति ही गृहस्थ तांत्रिकों के लिये मैथुन साधना पर आश्रित हैं, जबकि अविवाहित या सन्यासी तांत्रिकों के लिये तंत्र में मैथुन साधना की कोई व्यवस्था नहीं दी गयी है !

पंचमकार केवल वज्रयानी बौद्ध साधना और वाम मार्गी साधना में ही मान्य है ! शेष वैष्णव, शैव, शाक्त व गाणपत्य तंत्रों में पंचमकार साधना पध्यति का कोई स्थान नहीं है !

खास तौर पर तंत्र के उदगम स्थल कश्मीरी के शैव तंत्र शास्त्र में भी वामाचार पंचमकार साधना का कोई स्थान नहीं रहा है ! वैष्णवों को छोड़कर कहीं कहीं शाक्त तंत्र संप्रदाय में प्राकृतिक परिस्थिती वश मद्य, मांस व् बलि को स्वीकार कर लिया गया है परन्तु मैथुन को कहीं भी स्थान नहीं दिया गया है !

भारतीय समाज में वामाचार साधना का सदैव से भयंकर विरोध रहा है ! शूद्र वर्ण से आये बौद्ध तांत्रिकों ने अपने मानसिक विकारों के चलते उच्च वर्ण की महिलाओं को भोगने के लिये बौद्ध धर्म में तंत्र विद्ध्य के आधे अधूरे ज्ञान का सहारा लेकर शंकराचार्य के आगमन के पूर्व तिब्बत के अनीश्वरवादी काला जादू के प्रभाव में विशेषकर महानिर्वाण तंत्र, कुलार्णव तंत्र, योगिनी तंत्र, शक्ति-संगम तंत्र आदि नामों से विख्यात सम्प्रदायों द्वारा तंत्रों में पंचमकार को खूब बल दिया गया और इसे जानबूझ कर भ्रमवादी रहस्यवादी बनाये रखा गया !

जबकि बौद्ध द्वारा परम शुद्ध शैव तंत्र को विकृत करते हुये नमक के स्थान पर मांस, अदरक के स्थान पर मत्स्य मछली, द्रव्य के स्थान पर मुद्रा (जोकि धन को भी कहा जाता है), दूध, शहद, नारियल पानी आदि के स्थान पर मद्य अर्थात शराब, साधक में सम्पूर्ण समर्पण के स्थान पर मैथुन को स्थापित कर दिया गया !

तंत्र के इन्हीं पञ्च द्रव्यों को तंत्र में पञ्च तत्वों का प्रतिनिधि माना गया है ! नमक – पृथ्वी के गर्भ से निकलने के कारण पृथ्वी तत्व, अदरक – जठराग्नि को प्रवल करने के कारण अग्नि तत्व, मुद्रा चलायमान होने के कारण – वायु तत्व, दूध, शहद, नारियल पानी – जल तत्व, सम्पूर्ण समर्पण – आकाश तत्व के प्रतिनिधि हैं !

इस तरह पञ्च मकार तंत्र साधना के नाम पर मानसिक विकृत लोगों ने तंत्र को बदनाम कर दिया ! कालांतर में बौद्ध विहार इन्हीं वाममार्गी तांत्रिकों का अड्डा बन गये ! खुले आम खेतों में काम करने वाली या यात्रा करने वाली सुन्दर बहू बेटियों को यह बौद्ध वाममार्गी तांत्रिक साधक अपने काम वासना की शान्ति के लिये अपरहण करने लगे क्योंकि बौद्ध धर्म को राजा से संरक्षण प्राप्त था ! अत: पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं होती थी ! यही भारत में बौद्ध धर्म के पतन का कारण बना !

इस तरह की घटनाओं का सर्वाधिक क्षेत्र नेपाल और कश्मीर का तराई क्षेत्र था ! जहां के कुमारिल भट्ट जमींदार हुआ करते थे ! इन्हीं घटनाओं से प्रभावित होकर उन्होंने बौद्ध धर्म को अपने क्षेत्र से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया और निश्चित अवधि तक अपने संकल्प को पूर्ण न कर पाने के कारण उन्होंने अग्नि समाधि ले ली ! जिससे व्यथित होकर आदि गुरु शंकराचार्य ने कुमारिल भट्ट के शिष्य मंडन मिश्र के साथ मिलकर बौद्ध धर्म को भारत की भूमि से उखाड़ फेंका !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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