जानिए रुद्राक्ष की ऊर्जा किस तरह देती है नकारात्मक ऊर्जा से अभय दान !

पंचगव्य और मंत्रों की सही आवृत्ति से तैयार किया गया रुद्राक्ष प्रायः सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा को निष्प्रभावी करने या सोखने का सामर्थ्य रखता है ! वैज्ञानिक भाषा में कहें तो सही तरह से तैयार किये गये रुद्राक्ष से गामा ऊर्जा निकलती है जो एक कवच बन कर हमारी रक्षा करती है !

गामा किरणे ब्रह्माण्ड की अति उच्च ऊर्जा से हमारा सीधा सम्बन्ध जोड़ती है ! गामा किरण एक प्रकार का विद्युत चुम्बकीय विकिरण या फोटॉन हैं, जो परमाणु-नाभिक के रेडियोसक्रिय क्षय से उत्पन्न होता है ! गामा किरणों के सहयोग से भाग्य तक की ऊर्जा में परिवर्तन किया जा सकता है ! इसी प्रक्रिया द्वारा अर्ध-रत्नों के गुणों को बदल कर उसकी गुणवत्ता को बदला जाता है !

गामा किरणन नकारात्मक जीवाणुओं को मारने के लिये प्रयोग होती है ! गामा किरणन द्वारा चिकित्सा उपकरणों का रोगाणुनाशन (sterilization) किया जाता है जो रासायनिक विधि तथा अन्य विधियों से की जाने वाले रोगाणुनाशन का विकल्प बनकर उभरी है !

गामा किरणों के द्वारा भोज्य पदार्थों से उन जीवाणुओं को मार दिया जाता है ! जो उनका क्षय करते हैं ! अब तो कैंसर की चिकित्सा में भी गामा किरणों का उपयोग किया जाता है !
इस तरह रुद्राक्ष से निकलने वाली ऊर्जा प्रति ऑक्सीकरण की क्षमता के कारण डी.एन.ए. को नष्ट होने से बचा सकती है !

पंचगव्य से रुद्राक्ष के शोधन के बाद उसमें नाइट्रोजन, सल्फर, अमोनिया, कॉपर, लौह तत्त्व, यूरिक एसिड, यूरिया, फास्फेट, सोडियम, पोटेसियम, मैंगनीज, कार्बोलिक एसिड, कैल्सिअम, नमक, विटामिन बी, ऐ, डी, ई; एंजाइम, लैक्टोज, हिप्पुरिक अम्ल, कृएतिनिन, आरम हाइद्रक्साइद आदि तत्व मुख्य रूप से पाये जाते हैं ! जो तंत्रिका शक्ति का निर्माण करता है ! मेगनीसियम एवं कैल्सियम हृदयगति को नियंत्रित करता हैं !

यह बु़द्धि और स्मरण शक्ति बढ़ाने वाला, पित्त, कफ और वायु को दूर करने वाला है ! त्वचा रोग, वायु रोग, मुख रोग कुष्ठ रोग आदि का नाशक हो जाता है !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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