जानिए वास्को डी गामा भारत कैसे पहुंचा : Yogesh Mishra

गोवा में एक जगह है ! जिसे वास्को डी गामा के नाम से जाना जाता है ! क्या वास्को डी गामा के पहले सचमुच भारत खोया हुआ था और जिसके बारे में दुनिया कुछ नहीं जानती थी ! क्या वास्को डी गामा के पहले भारत में कोई विदेशी नहीं आया था और क्या भारत कोई ऐसी चीज है जिसे खोजा जायह ! जिस हजारों वर्ग किलोमीटर के भू भाग को वास्को डी गामा ने खोज लिया ! क्या आपको यह हास्यापद नहीं लगता है ! यह ऐसा ही है कि आप अपने पड़ोसी के घर को खोज लें और दुनिया में इतिहास प्रसिद्ध हो जायें !

हालांकि आजकल पढ़ाया जाता है कि भारत के समुद्री मार्ग की वास्को डी गामा ने खोज की थी ! सचमुच यह हद दर्जे की मूर्खता है ! जो कि भारतीय बच्चों को यह पढ़ाया जा रहा है ! पढ़ाया यह जाना चाहियह कि वास्को डी गामा ने योरोप को पहली बार भारत तक पहुंचने का समुद्री मार्ग बताया था ! दरअसल इसके पहले यूरोपी देशों के लिया भारत एक पहेली जैसा था ! यूरोप अरब के देशों से मसाले, मिर्च आदि खरीदता था लेकिन अरब देश के कारोबारी उसे यह नहीं बताते थे कि यह मसाले वह लाते कहाँ से हैं ! यूरोपीय इस बात को समझ चुके थे कि अरब कारोबारी उनसे जरूर कुछ छुपा रहे हैं !

इसी बीच यूरोप में प्रचलित भ्रांतियों में से एक यह भी थी कि पूर्व में कहीं एक प्रेस्टर जॉन नाम का राजा रहता है जो ईसाई है और अपार सपत्ति का मालिक है ! पुर्तागालियों को भरोसा था कि यह राजा भारत (या पूर्वी अफ्रीका) का राजा है ! इसका पता लगाने के लिए पुर्तगालियों के राजा जॉन ने दो गुप्तचरों को पूर्व की जमीनी यात्रा पर भेजा ! लेकिन जेरुशलम पहुँचने के बाद उन्हें मालूम हुआ कि अरबी सीखे बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है तो वह लौट गये !

इसके बाद मई 1487 में पेरो दा कोविल्हा और अफ़ोन्सो द पेवा को गुप्त यात्रा पर भेजा ! वह मिस्र में सिकंदरिया और काहिरा पहुँच गये ! उनमें से पेरो अदन, लाल सागर होते हुए कालीकट (भारत) पहुँच गया ! व्यापार और मार्गों को उसने निरीक्षण किया और काहिरा लौट गया ! वहाँ उसे दो पुर्तगाली यहूदियों से मुलाकात हुई जो राजा जॉन ने भेजा था ! जानकारियों का आदान प्रदान हुआ और कोविल्हा दक्षिण की ओर इथियोपिया चला गया !

वहाँ से वह लौटना चाहता था लेकिन उसके विश्व-ज्ञान को देखकर इथियोपिया के राजा ने अपना सलाहकार नियुक्त किया और बाद में पुर्तगाल भेजने का वादा किया ! लेकिन वह जल्दी मर गया और उसके बेटे ने उसकी यह कामना पूरी नहीं की ! कोविल्हा वहीं पर बस गया ! सन् 1526 के किसी पुर्तगाली मिशन ने बाद में पाया कि कोविल्हा इथियोपिया में तंदुरुस्त, सफल और स्वस्थ अवस्था में था ! उसने वहीं शादी कर ली और 74 वर्ष की आयु में मर गया !

सन् 1487 के अगस्त महीने में ही पुर्तगाली राजा ने बर्तोलोमेयो डियास (या डियाज़) नाम के नाविक को अफ्रीका का चक्कर लगाने के लिये भेजा ! वह पहला यूरोपियन नाविक था जो दक्षिणतम अफ्रीका के तट उत्तमाशा अंतरीप के पार पहुंचा ! लेकिन भयंकर समुद्री तूफान से परास्त होकर वापस लौट गया ! लेकिन उसके पश्चिम से पूरब की तरफ जा सकने से यह साबित हो गया कि अफ्रीका का दक्षिणी कोना है और दुनिया यहीं ख़त्म नहीं होती है जैसाकि पहले डर मौजूद था !

इसी बीच राजा मैनुएल ने भारत के लिए एक चार नौकाओं वाले दल का विचार रखा ! इस दल का कप्तान गामा को चुना गया ! कई लोग इससे चकित थे क्योंकि आसपास की लड़ाईयों के अलावा गामा को किसी बड़े सामुद्रिक चुनौती का अनुभव नहीं था ! लेकिन अनुशासित और राजा के विश्वस्त होने के कारण उसे नियुक्त कर लिया गया !

जनवरी 1498 तक वह लोग आज के मोज़ाम्बीक तक पहुँच गये थे ! जो पूर्वी अफ़्रीका का एक तटीय क्षेत्र है ! जिस पर अरब लोगों ने हिन्द महासागर के व्यापार नेटवर्क के एक भाग के रूप में नियंत्रण कर रखा था ! उनका पीछा एक क्रोधित भीड़ ने किया जिन्हें यह पता चल गया कि वास्को और उसके लोग मुसलमान नहीं हैं और वह वहाँ से कीनिया की ओर चल पड़े ! कीनिया के मोम्बासा में भी उसका विरोध हुआ ! वहां पहुँचने के बाद उसे बताया गया कि मोम्बासा शहर में कई ईसाई रहते हैं ! अत: वह वहीँ जायें अन्यथा मार दिये जायेंगे !

जहाज को तट से दूर रखने के बाद कुछ नाविक शहर के दौरे पर गये ! जहाँ उनकी गोरे ईसाईयों से मुलाकात हुई ! बाद में पता चला कि मोज़ाम्बिक से खबर मिलने के बाद वहाँ के सुल्तान ने उन्हें फंसाने के लिये एक योजना तैयार कर रखी थी ! गामा वहाँ से भाग निकला !

पर उसे भारत पहुँचने के लिये दिशाओं के जानकार नाविकों या निदेशकों की जरुरत थी ! अत: उसने एक छोटी नाव पर आ रहे चार लोगों को पकड़ लिया ! जिसमें एक बूढ़े मुसलमान व्यापारी ने बतलाया कि पास के तट मालिंदी में भारतीय नाविक रहते हैं ! जो उन्हें भारत पहुंचा सकते हैं ! कोई चारा न देख कर वास्को मालिंदी पहुँचा !

और भारतीयों को देख कर उसे लगा कि यह भी ईसाई हैं ! कृष्णा के उच्चारण को वास्को क्राइस्ट समझ रहे थे ! मालिंडि में वास्को ने एक भारतीय मार्ग दर्शक को काम पर रखा लिया ! जिसने आगे के मार्ग पर पुर्तगालियों की अगुवाई की और इस तरह 20 मई, 1498 के दिन कालीकट इसका मलयाली नाम कोळीकोड था में केरल ले आ गये ! जो भारत के दक्षिण पश्चिमी तट पर स्थित है !

यह यूरोपीय कारोबारी अरब के उस पार पूर्वी देशों से ज्यादा परिचित नहीं थे ! जहां तक सवाल भारत का है तो इसके एक ओर हिमालय की ऐसी श्रंखलाएं हैं ! जिसे पार करना उस दौर में असंभव ही था ! भारत के दूसरी ओर तीन ओर से भारत को समुद्र ने घेर रखा था ! ऐसे में यूरोप निवासियों के लिया भारत पहुंचने के तीन रास्ते थे ! पहला रूस पार करके चीन होते हुए बर्मा में पहुंचकर भारत में आना जोकि अनुमान से कहीं ज्यादा लंबा ओर जोखिम भरा था ! दूसरा रास्ता था अरब और ईरान को पार करके भारत पहुंचना ! लेकिन यह रास्ता अरब के लोग इस्तेमाल करते थे और वह किसी अन्य को अंदर घुसने नहीं देते थे ! तीसरा रास्ता समुद्र का था जिसमें चुनौती देने वाला सिर्फ दानवाकार समुद्र ही था !

ऐसे में ईसाईयों के धर्म गुरु पोप एलेक्जेंडर छठें के आदेश पर इटली के नाविक समूह एक ऐसे देश के समुद्री मार्ग को खोज करने यूरोप से निकल पड़े ! जिसके बारे में सुना बहुत था लेकिन देखा कभी नहीं था ! इन नाविकों में से एक का नाम क्रिस्टोफर कोलंबस था ! जो कि इटली के निवासी थे ! भारत का समुद्री मार्ग खोजने निकले कोलंबस अटलांटिक महासागर में भम्रित हो गये और भारत की जगह 3 अगस्त 1492 अमेरिका पहुंच गये ! कोलंबस को लगा कि अमेरिका ही भारत है !

इसी कारण वहां के मूल निवासियों को रेड इंडियंस के नाम से जाना जाने लगा ! इटली के कोलंबस की यात्रा के करीब 5 साल बाद इटली की बढ़ती सम्पन्नता को देख कर पुन: पोप के आदेश पर मई 1487 पुर्तगाल के नाविक वास्को डा गामा भारत का समुद्री मार्ग खोजने निकले ! वास्को डी गामा ने समुद्र के रास्ते 20 मई 1498 को कालीकट पहुंचकर यूरोपावासियों के लियह भारत पहुंचने का एक नया मार्ग खोज लिया था !

वास्को डा गामा ने कालीकट तट पहुंच कर वहां के राजा से कारोबार के लिया हामी भरवा ली ! कालीकट में 3 महीने रहने के बाद वह पुन: पुर्तगाल लौट गयह ! कालीकट अथवा ‘कोलिकोड’ केरल राज्य का एक नगर और पत्तन केन्द्र है ! वर्ष 1499 में पुनः पोप की घोषणा से भारत के खोज की खबर पूरे योरोप में फैलने लगी ! वास्को डी गामा ने योरोप के लुटेरों, शासकों और व्यापारियों को इकठ्ठा कर भारत को लूटने की विस्तृत योजना बनायी और योरोप के लुटेरों को भारत का नया रास्ता भारी कीमत लेकर दिखलाया !

इसके बाद भारत पर कब्जा जमाने के लिया योरोप के कई व्यापारी और राजाओं ने कोशिश की और समय-समय पर वह आयह और उन्होंने साथ ही साथ पोप के आदेश पर भारत के केरल राज्य के लोगों का धर्म परिवर्तन भी करवाना शुरू कर दिया ! पुर्तगालियों की वजह से धीरे धीरे ब्रिटिश लोग भी यहां आने लगे ! अंतत: 1615 ई. में यह क्षेत्र ब्रिटिश के अधिकार में चला गया ! 1698 ई. में यहां फ्रांसीसी बस्तियां बसीं ! फ्रांस और ब्रिटेन के बीच के युद्ध के काल में इस क्षेत्र की सत्ता समय समय पर बदलती रही ! पर दोनों का एक ही लक्ष्य था ! लोगों का धर्मान्तरण करवाना और भारत को लूटना !

1503 में वास्को पुर्तगाल लौट गयह और बीस साल वहां रहने के बाद वह पुन: भारत वापस चले आयह ! 24 मई 1524 को वास्को डी गामा की मृत्यु हो गई ! लिस्बन में वास्को के नाम का एक स्मारक आज भी मौजूद है ! इसी जगह से उन्होंने भारत की यात्रा शुरू की थी !

दरअसल, 1492 में नाविक राजकुमार हेनरी की नीति का अनुसरण करते हुयह पोप के आदेश पर किंग जॉन ने एक पुर्तगाली बेड़े को भारत भेजने की योजना बनाई थी ! ताकि एशिया के लिया समुद्री व्यापार का मार्ग खुल सके ! उनकी योजना मुसलमानों को आर्थिक रूप से पछाड़ने की थी ! जिनका उस समय भारत और अन्य पूर्वी देशों के साथ व्यापार पर एकाधिकार था !

एस्टा वह डिगामा को इस अभियान का नेतृत्व दिया गया ! लेकिन उनकी मृत्यु के बाद वास्को द गामा ने उनका स्थान ले लिया ! 8 जुलाई 1497 को वास्को द गामा चार जहाजों के एक बेड़े के साथ लिस्बन से रवाना हुयह ! वास्को द गामा के बेड़े के साथ तीन दुभाषियह भी थे ! जिसमें से दो अरबी बोलने वाले और एक कई बंटू बोलियों का जानकार था ! बेड़े में वह अपने साथ एक पेड्राओ (पाषाण स्तंभ) भी ले कर चलते थे ! जिसके माध्यम से वह अपनी खोज और जीती गई भूमि को चिन्हित कर सकें !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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