जानिए किस प्रकार ईश्वरीय शक्ति के कम होने के कारण रोगो से घिर जाता है मनुष्य । yogesh Mishra

रोग का कारण ईश्वरीय शक्ति का आभाव

मनुष्य ब्रम्हांड की एक अद्भुत रचना है जो ईश्वरीय शक्ति से संचालित है, इसे जितना समझा जाए उतना ही कम है. आधुनिक विज्ञान तो मनुष्य के कुछ ही हिस्सों तक पहुँचा है और इस क्षेत्र में पूर्ण रूप से लगे हुये हैं हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने भी इसी दिशा में शोध कार्य किया था और शरीर से सबंधित कई प्रकार के गोपनीय तथ्यों के बारे में अपनी तपस्या से पता लगाया था. मनुष्य शरीर एक अत्यधिक जटिल रचना है,

यह ठीक एक यंत्र की तरह है जिसमे कई प्रकार के पुर्जे होते है और कोई भी एक पुर्जा खराब होने पर पूरा यंत्र खराब हो जाता है. हमारा शरीर स्वस्थ हो तब हमारा जीवन स्वस्थ होता है और हमारा शरीर अपनी गतिशिलता के अनुरूप कार्यशील रहेगा. लेकिन जब इस गतिशिलता में रुकावट आती है तो कई प्रकार की समस्याओ का सामना करना पड़ता है. इस गतिशीलता में शरीर को जो बाधा प्राप्त हो रही है उसे ही रोग कहते है.

रोग मनुष्य को मात्र बाह्य या शारीरिक रूप से नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी तोड़ देता है तथा जीवन के क्रियाकलाप में विक्षेप का प्रसार करने लगता है. आज के युग की चिकित्सा पद्धति मात्र बाह्य लक्षणों की तरफ ध्यान देती है और मानसिक रूप से क्षति पहुँचाती है जिससे शरीर के सूक्ष्म भाग और शरीर के अंदर के अन्य शरीर तथा तत्वों पर जो क्षति होती है उस की क्षतिपूर्ती करना वर्तमान चिकित्सा के लिये असंभव है इसीलिए कई बार कई प्रकार के रोग उत्तम चिकित्सा लेने पर भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाते हैं

ईश्वरीय साधना क्षेत्र के कई अद्भूत विधान है जिसके माध्यम से रोगों से मुक्ति पा कर एक सम्पूर्ण जीवन को जिया जा सकता है. ऐसे दुर्लभ विधानों के माध्यम से जहाँ एक और रोग और रोगजन्य कष्ट और पीड़ा से मुक्ति मिलती है वहीँ दूसरी और जो क्षति हुई है उसकी भी पूर्ति होती है जिससे भविष्य में वह रोग के लक्षण पुनः प्रगट नहीं होते है. इसके लिये सर्वप्रथम इष्ट निर्धारण कर उसकी आराधना करिये तथा साथ ही पितृ पूजन और कुल देव पूजन अवश्य करिये जिससे ईश्वरीय शक्ति का संचार बढेगा और आप को निश्चित स्वस्थ लाभ होगा साथ ही अति भोजन व दूषित धन से भी परहेज कीजिये तभी स्थाई लाभ होगा

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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