( ज्योतिषीय विश्लेषण )
ज्योतिषीय गणनाओं से ऐसा आभास हो रहा है, कि समस्त मानवता महाविनाश की ओर बढ़ रही है ! ज्योतिष के अनुसार मानवता की रक्षा तीन दिव्य ऊर्जा मिलकर करती हैं ! पितृ गुरु और ईश्वर !
क्योंकि गुरु बृहस्पति ग्रह 14 मई 2025 से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे और 12 महीने तक इसी राशि में रहेंगे । इस दौरान, बृहस्पति अतिचारी होंगे, यानी अपनी सामान्य गति से तेज चलेंगे । यह गुरु के परेशान और चिन्तित होने की सूचना है ! गुरु के अतिचारी होने के दौरान मानवता ने पूर्व में अनेकों महाविनाश देखे हैं !
गुरु (बृहस्पति) ग्रह 2025 से 2032 तक अतिचारी रहेंगे ! इस काल खण्ड में वह अनेकों बार वक्री भी होंगे ! यह जन सामान्य के ऊपर गुरु कृपा के लाभ के न मिलने की सूचना है !
इसी तरह इस साल सितंबर के पितृपक्ष के महीने में विशेष और शक्तिशाली संयोग बनने जा रहे हैं। वैदिक पंचांग अनुसार पितृ पक्ष में इस साल सूर्य और चंद्र ग्रहण पड़ने जा रहे हैं। जो ईश्वरीय व्यवस्था में पितरों की कृपा न मिल पाने की सूचना है !
7 सितंबर 2025 को पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है और इसी रात्रि “ब्लड मून” चंद्रग्रहण लगेगा ! जिसकी कुल अवधि 5 घंटे 27 मिनट की होगी। जो सामान्य से अधिक है ! यह “ब्लड मून” चंद्रग्रहण सदैव खून की नदियाँ बहाता है ! जो अनेकों देशों में जन विद्रोह और आक्रमण की अग्रिम चेतावनी है !
यह ग्रहण 7 सितंबर 2025 की रात में 8 बजकर 58 मिनट से मध्यरात्रि 1 बजकर 25 मिनट तक का होगा। यह ग्रहण भारत के अलावा यूरोप, संपूर्ण एशिया के देशों, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों में यह दिखाई देगा।
इसी तरह पितृ पक्ष की समाप्ति पर 21 सितंबर 2025 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। जो भारतीय समयानुसार रात करीब 11 बजे शुरू होगा जो 22 सितंबर को सुबह 03 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा। इस तरह से इस ग्रहण की कुल अवधि करीब 4 घंटे 24 मिनट की रहेगी। यह ग्रहण न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका महाद्वीप में दिखाई देगा। साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
लेकिन यह ग्रहण दुनिया भर में गृह युद्ध, जन आन्दोलन, सरकारों के विपरीत बड़े संकट और आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ाती है ! साथ ही यह जन सामान्य की आय की तुलना में अधिक खर्च करवा कर समाज को धन हानि, स्वस्थ्य हानि के साथ बेरोजगारी की आशंका को भी बढ़ाती है और सामान्य दैनिक कामों में बाधाओं को पैदा करती है ! साथ ही भीषण प्राकृतिक आपदाओं की भी सूचना है !
इसलिये इस दौरान व्यक्ति को हर कार्य अपने गुरु से पूंछ कर, पितरों का स्मरण करके और ईश्वर को साझेदार बनाकर ईश्वर की इच्छा के निमित्त करना चाहिये ! तभी उसका कल्याण होगा !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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