कारोबार बंद होने का मुख्य ज्योतिषीय कारण शनि, बुध और दशम (कर्म) या एकादश (आय) भाव की ऊर्जा का कमजोर होना है।
बुध व्यापार की बुद्धि देता है, शनि स्थायित्व और छठा भाव व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में विजय देता है।
जब गोचर या दशा में इन ग्रहों पर राहु-केतु या मंगल, शनि का क्रूर प्रभाव आ जाता है, तो व्यवसाय अचानक ठप हो जाता है।
व्यवसाये के पुनः संचालन के लिये अलग अलग कुण्डली में अलग अलग निवारण पध्यति लागू होती है, किन्तु कुछ सामान्य उपाये यहाँ बतलाये जा रहे हैं !
बुध का बल: प्रत्येक बुधवार को गणेश जी को दूर्वा (दूध घास) चढ़ाएं और पक्षियों को हरा मूंग खिलाएं। इससे व्यापारिक निर्णय सही होंगे।
शनि की कृपा: शनिवार की शाम कार्यस्थल या घर पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें।
ऊर्जा का शुद्धीकरण: दुकान या ऑफिस के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को साफ रखें और वहां नियमित रूप से कपूर जलाएं।
सकारात्मक ऊर्जा और सही रणनीतिक प्रयास से व्यवसाय फिर गति पकड़ लेगा।
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योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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