ब्रह्मास्मि क्रिया योग पर नव सत्र आरम्भ

शैव ग्राम में मस्तिष्क के नव-निर्माण द्वारा दीर्घ आयु होने पर चर्चा

एक समय था जब विज्ञान जगत में यह पक्का विश्वास था कि हमारे मस्तिष्क की बनावट बचपन में ही तय हो जाती है और इसे किसी यंत्र की तरह बदला नहीं जा सकता है।

लेकिन आज आधुनिक तंत्रिका विज्ञान ने भगवान शिव के ज्ञान को प्रमाणित करते हुये यह बतलाया है हमारे मस्तिष्क में लगभग 96 अरब तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो मानवीय विद्युत और हार्मोनल रासायनों के माध्यम से जीवन भर लगातार नये संपर्क पाथ का निर्माण करती रहती हैं।

इसका सीधा अर्थ है कि यदि हम अपनी ‘संस्कार चिकित्सा’ करें और ‘ब्रह्मास्मि क्रिया योग’ का अभ्यास करें तो अपने वृत्तियों में परिवर्तन करके और नये अनुभवों को सीखकर किसी भी उम्र में अपने दिमाग की बनावट और कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल सकते हैं।

वृद्धावस्था में भी हमारा मस्तिष्क खुद को नया रूप देने में पूरी तरह सक्षम होता है। बस आवश्यकता है संस्कार चिकित्सा द्वारा अपनी अवांछित वृत्तियों को त्याग कर ब्रह्मास्मि क्रिया योग द्वारा नई मस्तिष्क ऊर्जा को निर्मित करने की ! यही दीर्घ आयु होने का भी रहस्य है !

इसका विशेष डिजिटल आन लाईन सत्र आरम्भ किया जा रहा है, जो साथी इसमें प्रवेश लेना चाहते हैं, वह संस्थान में संपर्क करके यथा शीध्र अपना पंजीकरण करवा लें ! स्थान सीमित है !

कोई असुविधा होने पर संस्थान के जन संपर्क प्रभारी श्री शिवम् शुक्ला जिनका संपर्क नम्बर – 63933 30597 उनसे वार्ता कर सकते हैं ! कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं या या कमेन्ट में अपना नाम व नम्बर दीजिये जिससे हम आपसे संपर्क कर सकें !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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