“असंभव” मानसिक जड़ता है, जो हमारे संकीर्ण सोच की अभिव्यक्ति मात्र है, जो हमारे अज्ञात भय और सीमित सोच से निर्मित होता है। इसे चिंतन पाथ को बदल कर बदला जा सकता है।
भविष्य का जीवन सदैव असंभव के उस पार खड़ा होता है ! जो आज के असंभव को हरा नहीं सकता है, वह कभी भी भविष्य को जीत नहीं सकता है !
अर्थात असंभव के उस पार ही जीवन की बड़ी सफलता रहती है, संसार संभव की मर्यादा में ही घूमता रहता है लेकिन सफल व्यक्ति असंभव के उस पार तक जाकर सफल हो जाता है ! सफलता हमेशा असम्भव को पार करने वाले की प्रतीक्षा कर रही होती है, लेकिन संसार वहां नहीं पहुँच पाता है !
अर्थात भविष्य उन्हीं का है जो आज के “असंभव” से आँखें मिलाने का साहस रखता है और जो वर्तमान की सीमाओं से समझौता कर लेता है, वह भविष्य का निर्माण कभी नहीं बन पाता है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक – शैव ग्राम
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