यरुशलम शहर को ईसाई, इस्लाम, अर्मेनियाई और यहूदी चारों ही धर्म के लोग अपने-अपने धर्मों के अनुसार खास महत्व देते हैं ! इस किलेनुमा सुरक्षा दीवार से विभाजित इस शहर में ईसाई, इस्लामी, यहूदी और अर्मेनियाई धर्म के लोग आज भी रहते हैं !
ईसाई के ‘द चर्च ऑफ द होली सेपल्कर’, इस्लाम के मस्जिद अल अक्सा और यहूदी के ‘द होली ऑफ द होलीज’ के इतिहास का धार्मिक सत्य इससे जुड़ा है ! इस शहर में 158 गिरिजाघर तथा 73 मस्जिदें स्थित हैं ! यहीं पर यहूदियों का परम पवित्र “सोलोमन मन्दिर” हुआ करता था, जिसे रोमनों ने नष्ट कर दिया था ! यह शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रहा है ! तो यहीं से हज़रत मुहम्मद जन्नत गये थे !
यरुशलम से जुड़ा यहूदी धर्म लगभग 4000 साल पुराना है ! इसाई धर्म 2000 वर्ष पुराना है और इस्लाम धर्म लगभग 1400 साल पुराना है !
लेकिन इस सब के अलावा एक सत्य ऐसा भी है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं और वह है यरुशलम के हिन्दू तंत्र पीठ होने का सत्य ! जिसे इतिहास के पन्नों से हटा दिया गया है !
महाभारत ग्रन्थ बतलाता है कि महाभारत युद्ध में संभावित रूप से प्रयोग किये जाने वाले घातक परमाणु अस्त्र शास्त्रों के भय से बहुत से यदुवंशी परिवार द्वारिका छोड़कर समुद्र के रास्ते पश्चिम की ओर भाग गये थे ! जो भागकर यरुशलम में बस गये ! यह घटना लगभग 3500 ईसा पूर्व की है !
इन्हीं यदुवंशियों ने यरुशलम नगर की स्थापना की और अपनी पहचान छिपाने के लिये एक नये धर्म की स्थापना की ! जो बाद में यहूदी धर्म के नाम से प्रचलित हुआ !
शोधकर्ताओं ने इसके बाद के यहूदी धर्म के संस्थापक मूसा और श्रीकृष्ण की समानता पर शोध करके यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि यहूदी और हिन्दू धर्म में अनेक समानतायें हैं !
जैसे भगवान श्रीकृष्ण और मूसा और उनके भाई बलराम और हारून के गुणों और कार्यो में बहुत हद तक समानता है !
1. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पहले अत्याचारी कंस के लिये आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की 8 वी संतान तेरा वध करेगी ! ठीक इसी तरह मूसा के जन्म के पहले मिस्र के राजा फराओ के लिये भविष्यवाणी की गई थी कि तेरा अंत राज्य में जन्मे एक व्यक्ति के हाथों होगा ! जो जन्म ले चुका है !
2. इस आकाशवाणी सुनने के बाद कंस ने 8वीं संतान के उत्पन्न होकर गायब होने के बाद राज्य के सभी बच्चों को मारने का हुक्म दे दिया था ! ठीक उसी तरह मिस्र के राजा ने भी राज्य के सभी बच्चों को मारने का हुक्म दे दिया था ! जो 1 वर्ष से कम उम्र के थे !
3. हुक्म के पहले ही जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण को उनके पिता ने एक सूपड़े में रखकर नदी के पार नंद के यहां छोड़ दिया था ! उसी तरह मूसा की माता ने मूसा को एक टोकरी में रख कर नदी में छोड़ दिया था ! कुछ समय बाद मिस्र की रानी ने जब उस टोकरी को देखा तो उन्होंने उसमें से उस बच्चे को लेकर उसका पालन-पोषण किया ! इस तरह श्रीकृष्ण और प्रॉफेट मूसा को दूसरी मां ने पाला था !
4. जिस तरह श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम थे ! लेकिन प्रमुखता श्रीकृष्ण की थी ! इसी तरह प्रॉफेट मूसा के बड़े भाई हारून थे लेकिन प्रसिद्धि प्रॉफेट मूसा को ही मिली थी !
5. जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण के मुख से गीता की वाणी प्रकट हुई उसी तरह प्रॉफेट मूसा के मुख से यहूदी धर्म के 10 नियम प्रगट हुये ! जिन पर यहूदी धर्म आज भी कायम है !
6. भगवान श्रीकृष्ण जिस तरह अपने लोगों के साथ मथुरा से निकलकर अपने पूर्वजों की भूमि छोड़ कर द्वारका चले गये थे ! उसी तरह मूसा को जब पता चला कि मेरे पूर्वजों की भूमि तो बनी-इसराइल (यरुशलम) है, तो वह भी अपने सभी हिब्रू कबीले के लोगों को लेकर मिस्र से निकल गये थे ! यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पलायन था !
7. श्रीकृष्ण के आखिरी दिनों में यदुवंशियों ने उनकी अवहेलना करना शुरू कर दिया था ! इसी कारण उनमें आपस में युद्ध हुआ और सभी मारे गये ! ठीक इसी तरह मूसा के अंतिम दिनों बनी-इसराइल के लोगों ने मूसा के आदेशों को मानने से इंकार कर दिया था ! जिसके कारण उनके कबीले में बिखराव हो गया और वह 12 यहूदी कबीलों में बंट गये और वह अपने धर्म से गिर गये !
इस रेगिस्तान में गोपालन योग्य भूमि के अभाव में इन लोगों ने गौ पालन करना छोड़ दिया और भेड़ और बकरी जोकि कम मात्रा में भोजन करते हैं ! इस तरह के जानवरों को पालना शुरू कर दिया !
रेगिस्तान होने के कारण फसल न पाने की स्थिति में इन्होंने अपने पाले हुये भेड़, बकरी, मुर्गे आदि को ही खाना शुरु कर दिया और यह सब धीरे-धीरे मांसाहारी हो गये ! जो कालांतर में गौ मांस भी खाने लगे !
विज्ञान और तकनीकी के अभाव के कारण यह लोग पूरी दुनिया में जीविकोपार्जन हेतु अलग अलग कबीलों में निकले और व्यापार व्यवसाय करने के उद्देश्य से बिखर गये और धीरे-धीरे इन्होंने विश्व के सभी प्रतिष्ठित व्यवसायों पर अपना नियंत्रण जमा लिया ! जो कि विश्व में कई बार अनेक देशों में इनके साथ हुये युद्ध का कारण भी बना !
लगभग 1300 ईसा पूर्व इन्हें मिस्री के शासक फराओं के अत्याचारों से तंग आकर इन्हें यरुशलम छोड़ना पड़ा और सैकड़ों वर्ष के संघर्ष के बाद मई 1948 में इन्हें पुनः यरुशलम का कुछ अंश मिला और इसराइल नाम के नये राष्ट्र की स्थापना हुई ! जो अब यहूदियों का स्वतंत्र राष्ट्र है !!
