शैव को संसार में कैसे जीना चाहिये

शैव जीवन शैली का दर्शन अत्यंत गूढ़, यथार्थवादी और कर्म-प्रधान है। शैव जीवन दर्शन को मानने वाले के सभी सांसारिक कार्य शिव करते हैं,” तो इसका अर्थ यह नहीं है कि शैव अपने जीवन में अकर्मण्य होकर बैठ जाये।

बल्कि इसका वास्तविक अर्थ यह है कि शैव ‘कर्ता भाव’ का विसर्जन करके न्यासी भाव से संसार में लोक कल्याण का कार्य करे। क्योंकि यह संसार शिव का ही बनाया हुआ है ! इस संसार के सभी जीव जंतु पशु पक्षी वनस्पति सभी में शिव का ही अंश है !

इसलिये यदि शैव का सभी संसारिक कार्य शिव की कृपा से हो रहा है, तो वास्तविक शैव को अपना जीवन शिव की सृष्टि की सेवा में लगा देना चाहिये !

क्योंकि शैव भक्त का जीवन एक संन्यासी और एक कुशल प्रशासक का अद्भुत मिश्रण होता है। वह संसार में रहकर, संसार के सभी महत्वपूर्ण कार्यों को सर्वोच्च दक्षता के साथ कर लेता है, साथ ही भीतर से पूरी तरह अनासक्त और शांत भी रहता है ! अत: उसे अपनी इस सांसारिक दक्षता के कारण उसे अपना जीवन संसार के कल्याण के लिये लगा देना चाहिये।

क्योंकि अब वह शिव की कृपा से इस संसार में एक कठोर, यथार्थवादी, प्रकृति के नियमों में गहरी समझ रखने वाली बुद्धि प्राप्त जो चुका है। इस बौद्धिक परिपक्वता के साथ शैव को इस संसार में लोक कल्याण का कार्य करते रहना चाहिये ! यही उसके शैव जीवन की सार्थकता है !! 

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

शिव कृपा के लिये संस्थान क्लास से जुड़िये

मोबाईल : 9453092553

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