शैव ग्राम मानवता की नई दिशा और प्राकृतिक ईश्वरीय ऊर्जा के साथ जीवन की कला का प्रत्यक्ष प्रगटीकरण है !
हाल ही में आयोजित एक विशेष बैठक में ‘शैव ग्राम’ नामक एक अत्यंत प्रभावशाली और महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की गई है। राजस्थान के सवाई माधोपुर (रणथम्भौर) में आकार ले रहा यह योजना, संस्थान का एक ‘ड्रीम योजना’ है। इसे आगामी एक वर्ष के भीतर पूरी सक्रियता और ताकत के साथ धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है।
शैव ग्राम “ना भूतो ना भविष्यति” (न ऐसा पहले हुआ, न भविष्य में होगा) की तर्ज पर काम कर रहा है। यह पिछले दस हजार वर्षों में भटकी हुई मानवता को पुनः आत्म-बोध, समत्व और प्राकृतिक लय की ओर ले जाने का एक अभूतपूर्व प्रयास है।
शैव ग्राम केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि मानवता को उसकी जड़ों और प्रकृति से पुनः जोड़ने का एक ऐतिहासिक महा-अभियान है।
‘ईश्वर का घर’ और मेरी दृष्टि
शैव ग्राम को स्वविवेक से “ईश्वर का घर” की संज्ञा दी गई है। यदि कोई यह जानना चाहता है कि ईश्वर का प्रभाव क्या है और वह मनुष्य को किस रूप में देखना चाहता है, तो उसे इस शैव ग्राम के दर्शन करने होंगे।
यहाँ युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन के लिये बहुत सारी योजनायें हैं ! इस योजना का मुख्य फोकस हमारी अगली पीढ़ी और युवाओं पर है। आधुनिक भटकावों (जैसे हिप्पी या जेन-जी कल्चर) से बचाकर युवाओं को एक सही, अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण दिशा देना शैव ग्राम का प्राथमिक लक्ष्य है।
यहाँ आस्था का वैज्ञानिकरण होगा ! यहाँ अंधविश्वास का कोई स्थान नहीं होगा। श्रद्धा और आस्था को विज्ञान की कसौटी पर परखा जाएगा। जो तार्किक होगा उसे अपनाया जाएगा, अन्यथा उसे तर्क सहित खारिज कर दिया जाएगा।
प्रकृति के साथ संवाद और जीवन शैली
शैव ग्राम में पत्थर की मूर्तियों के साथ जीने के बजाय प्रत्यक्ष जीवन के साथ जीने का अभ्यास कराया जाएगा।
जिसके लिये जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों और वनस्पतियों के साथ जीवंत और भावनात्मक संवाद स्थापित करने की कला सिखाई जाएगी।
यहाँ पर जीरो बजट लाइफस्टाइल का भी प्रशिक्षण दिया जायेगा ! बाजारीकरण के प्रभाव से मुक्त होकर, ‘रिवर्स इंजीनियरिंग’ के माध्यम से हमारे पूर्वजों (ब्रह्म विद्या, वनस्पति और मनोचिकित्सा के जानकारों) की तरह प्राकृतिक जीवन जीने का अभ्यास कराया जाएगा।
प्रमुख पाठ्यक्रम और साधनाएं
शैव ग्राम में अलग-अलग मेधा शक्ति वाले व्यक्तियों के लिए लगभग 700 विशेष कोर्स तैयार किए गए हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
संस्कार चिकित्सा और सब-कॉन्शियस डिटॉक्स: युवाओं को ‘ओवर-थिंकिंग’ से निकालकर, उनके अवचेतन मन को रिफ्रेश और अपडेट करना, ताकि मस्तिष्क में न्यूरॉन के नए रास्ते विकसित हो सकें।
पास्ट ट्रॉमा हीलिंग: जन्म-जन्मांतर के आघातों और मन की उलझनों से मुक्ति दिलाना।
ऊर्जा और समय का प्रबंधन: अपनी आंतरिक व बौद्धिक ऊर्जा का सही समय पर सही उपयोग करना। मेरुदंड में छिपी सफलताओं की ‘कोडिंग’ को डिकोड करना सिखाया जाएगा।
तमस से मुक्ति: नाड़ियों में जमे अंधकार और आलस्य को योगिक प्रक्रियाओं द्वारा दूर करना।
क्षमा, कृतज्ञता और कैवल्य की साधना: जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्षमा और धन्यवाद की ऊर्जा का उपयोग करना तथा अकेलेपन को ‘कैवल्य’ (परम ईश्वरीय आशीर्वाद) में बदलना।
जेनरेशन गैप प्रबंधन: परिवारों में पीढ़ीगत दूरियों को मिटाकर, मोह के बजाय ‘कर्तव्य’ के आधार पर रिश्ते निभाना।
प्रशासनिक ढांचा और वैश्विक विस्तार
शैव ग्राम का संचालन पूर्णतः लोकतांत्रिक और अनुशासित तरीके से होगा:
शैव संसद: 108 सदस्यों की एक संसद का गठन किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश के साथी शामिल होंगे। यह संसद शैव ग्राम की नीतियों को तय करेगा।
कार्यकारिणी: नीतियों को लागू करने के लिए प्रथम चरण में 11 सदस्यों की एक कार्यकारिणी बनाई जा रही है। जो शैव सदन के निर्देश पर कार्य करेगी !
वैश्विक स्वयंसेवक: आगामी तीन वर्षों में विश्वभर में 10,000 स्वयंसेवक तैयार करने का लक्ष्य है, जो लोगों को शैव जीवन शैली के अनुसार जीने की कला सिखाएंगे।
डिजिटल मैनेजमेंट: शैव ग्राम डिजिटल रूप से संचालित होगा, जिससे अमेरिका, चीन या दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति इसमें अपना योगदान दे सकेगा।
जुड़ने के अवसर और आगामी कदम
शैव ग्राम की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक विशेष पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है। संस्थान के सदस्यों के लिए यह पुस्तक उपलब्ध होगी। देश के किसी भी क्षेत्र से 25 या उससे अधिक पुस्तकों का ऑर्डर देने पर कोरियर शुल्क संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, जो लोग अपने ज्ञान और अनुभवों के आधार पर कोई नया कोर्स डिज़ाइन करवाना चाहते हैं, उन्हें इसका पूरा अवसर दिया जाएगा।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553

