पेड़ों की सेवा करना मात्र आध्यात्मिक या भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि यह शैव चिकित्सा में अवसाद को दूर करने का एक प्रामाणिक वैज्ञानिक तरीका है। इसे मानव हार्मोन और वनस्पति विज्ञान के आपसी तालमेल से स्पष्ट करता हूँ ।
जब व्यक्ति अवसाद में होता है, तब मानव हार्मोन में सेरोटोनिन और कोर्टिसोल की मात्रा उसके शरीर में बहुत बढ़ जाती है ! जो मिट्टी और पौधों के संपर्क में आने से पौधों द्वारा उसे सोख लिया जाता है, जिससे मस्तिष्क में ‘हैप्पी हार्मोन’ का स्राव बढ़ जाता है।
क्योंकि मिट्टी में माइकोबैक्टीरियम वैक नामक एक अत्यंत लाभकारी जीवाणु पाया जाता है। जब यह त्वचा या श्वास के संपर्क में आता है, तो मस्तिष्क में सेरोटोनिन तनाव के हार्मोन को खुशी के हार्मोन में बदल देता है ! इससे स्ट्रेस हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है।
साथ ही पौधों को सींचने और उनकी देखभाल करने से मनुष्य के भीतर जुड़ाव की भावना पैदा होती है, जिससे ऑक्सीटोसिन प्रेम का हार्मोन रिलीज होता है, जो अवसाद को कम कर देता है।
वनस्पति विज्ञान के अनुसार, पेड़ अपने बचाव के लिए हवा में ‘फाइटोनसाइड्स’ नामक कार्बनिक यौगिक छोड़ते रहते हैं। जब हम पेड़ों के पास सांस लेते हैं, तो यह यौगिक हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं और रक्तचाप को भी सामान्य करते हैं।
पौधों को नंगे हाथ छूने से शरीर का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक की अतिरिक्त ऊर्जा भी पृथ्वी के इलेक्ट्रॉन्स के साथ मिलकर न्यूट्रल हो जाती है, जिससे मानसिक शांति के साथ साथ सैकड़ों असाध्य रोगों से मुक्ति भी मिलती है।
इसलिये पेड़ों की सेवा करना मानव शरीर के रासायनिक संतुलन और वृक्षों की हीलिंग ऊर्जा का एक अद्भुत वैज्ञानिक संयोजन है, जो अवसाद से उबरने में एक प्राकृतिक थेरेपी का काम करता है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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