भारत के सर्वनाश का क्या कारण है : Yogesh Mishra

दुनिया में दो तरह के राष्ट्र हैं ! एक वह जहां के निवासी पीढ़ी दर पीढ़ी से वही निवास करते चले आ रहे हैं ! जैसे भारत, इंग्लैंड, अरब, चीन, रूस आदि और दूसरे ओर वह राष्ट्र हैं जहां के मूल निवासियों को बाहर से आये आक्रान्ताओं ने या तो युद्ध में हरा दिया या फिर वहां के अधिकांश मूल निवासियों की हत्या कर दी और वहां पर अपना शासन जमा लिया ! जैसे अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा, आदि !

पहले तरह की राष्ट्रों की एक अपनी अति प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और जीवन शैली है ! जिसमें उनके पूर्वजों ने अनेकों प्रयोग करने के बाद अपने राष्ट्र के लिये सर्वश्रेष्ठ शासन पद्धति का चयन किया था !

भारत के परिपेक्ष में कहा जाये तो भारत में राजशाही शासन पद्धति को ही भारतीय सभ्यता और संस्कृति के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ माना गया है ! इसीलिये अनादि काल से भारत में राजा और प्रजा की शासन व्यवस्था भी हमारे यहाँ स्वीकार की जाती रही है !

हमारे सभी भगवान किसी न किसी राजा के पुत्र थे ! जिन्होंने अपने राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिये अपना सर्वस्व त्याग कर राष्ट्र हित में कार्य किया था और भारत के साम्राज्य को अरब और योरोप तक फैलाया था ! जिस पर आज हम इतराते हैं कि हमारे पूर्वजों का शासन ईरान इराक अरब तक था !

शायद यह इसलिये था कि उन्हें यह मालूम था यह राष्ट्र उनके पूर्वजों का है और आगे भी आने वाली वीडियो का बना रहेगा ! इसलिये इस राष्ट्र की रक्षा करना उनका नैतिक, धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक कर्तव्य था ! और वह लोग अपने साम्राज्य की रक्षा उसके आन बान शान के लिये मर मिट जाते थे !

 किन्तु भारत की राजनीति में लोकतंत्र के माध्यम से जबसे चरित्रहीन, वंश विहीन, भिखारियों का प्रवेश हुआ तब से भारत में राजसत्ता वाली शासन पद्धति भारत का संविधान लागू होने के बाद पूरी तरह से समाप्त कर दी गई और अब भारत में चयनित शासन पद्धति लागू है ! जिसके तहत भारत का आम जनमानस अपने जनप्रतिनिधियों का चुनाव करता है और वह जनप्रतिनिधि के बहुमत के आधार पर भारत के शासक का चुनाव करते हैं !

 जिसमें बहुत बड़ी विकृत भूमिका आज भारत के राजनैतिक दलों की है ! जबकि लोकतंत्र में राजनैतिक दलों का प्रवेश करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है !

क्योंकि राजनीतिक दलों का न तो कोई चरित्र है और न ही इनमें राष्ट्रप्रेम होता है ! वह एक चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त गिरोह हैं ! इनका एक मात्र उद्देश्य भारत की सत्ता पर अपने राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों को स्थापित कर देश को लूटना है और वह जानते हैं कि एक बार में इस लूट के लाईसंस की अधिकतम सीमा 5 वर्ष की है ! शायद इसी वजह से जब कोई राजनीतिक दल सत्ता में आता है तो वह राष्ट्र रक्षा, राष्ट्र सेवा, राष्ट्र निष्ठा के स्थान पर सबसे पहले लूटपाट के नए-नए तरीके इजाद करने लगता है !

 जैसे पूर्व में जब लुटेरे भारत आया करते थे ! तो सबसे पहले वह अधिक से अधिक लूटने की कोशिश करते थे क्योंकि उन्हें यह मालूम था कि आज वह जो भारत को लूट लेंगे ! पता नहीं दोबारा उन्हें इस तरह के लूटने का मौका मिलेगा भी या नहीं मिलेगा !

 ठीक इसी तरह आज राजनीतिक दलों के माध्यम से चयनित जनप्रतिनिधि जो भारत की सत्ता पर काबिज हैं ! वह जानते हैं कि आज हमें लोकतंत्र में जो विधिक शक्तियां प्राप्त हैं ! जिनके माध्यम से हम भारत के आम आवाम को अधिक से अधिक लूट सकते हैं ! यह अवसर पता नहीं दोबारा हमें प्राप्त होगा भी या नहीं ! इसलिये आज देश को लूट लिया जाये ! देश के रक्षा और विकास की चिन्ता बाद में होगी !

इसी वजह से उन लोगों का ध्यान कभी भी राष्ट्र के निर्माण और विकास की ओर नहीं जाता है और न ही वह कोई ऐसी स्थाई योजना बनाना चाहते हैं कि जिससे राष्ट्र पीढ़ी दर पीढ़ी विकसित होता रहे ! क्योंकि उनकी रूचि मात्र अपने कार्यकाल तक सीमित होती है ! वह जानते हैं कि अगले कार्यकाल में हो सकता है कि मेरे स्थान पर मेरा विरोधी राजनीतिक दल सत्ता में बैठा हो ! तो उस समय की चिंता मैं क्यों करूँ !

 जब कि राज सत्ता शासन व्यवस्था में पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही वंश का शासन हुआ करता था ! जिससे उस वंश की निष्ठा अपने राष्ट्र के प्रति होती थी और राष्ट्र के नागरिकों की निष्ठा अपने शासक के प्रति होती थी ! यह दोनों के आपसी निष्ठा और विश्वास का संबंध ही राष्ट्र को आगे बढ़ाता था ! जो चयनित लोकतंत्र में देखने को नहीं मिलता है ! शायद यही भारत के सर्वनाश का कारण है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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मोबाईल : 9453092553

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