मारण तंत्र कैसे काम करता है : Yogesh Mishra

मारण तंत्र का उपचार करने उपरांत भी व्यक्ति की मृत्यु क्यों हो जाती है

मेरे शिष्य बलजीत जी के मित्र के पिताजी पर मारण तंत्र का प्रयोग किया गया था ! जो कि लगभग डेढ़ माह से तंत्र के प्रभाव में थे और उनका स्वास्थ्य निरंतर गिरता जा रहा था ! तीन दिन पूर्व बलजीत जी ने मुझे संपर्क किया और अपने मित्र के पिताजी की फोटो मेरे पास भेजी और मुझसे कहा कि यदि कोई तंत्र का प्रभाव हो तो आप कृपया उसे काट दीजिये !

मैंने फोटो से ज्ञात किया कि मारण तंत्र का प्रयोग किया गया है किंतु तंत्र की गंभीरता को देखते हुए मैंने उसमें कोई रुचि नहीं ली ! कल प्रातः बलजीत के मित्र का मेरे पास आग्रह पूर्वक फोन आया कि गुरु जी इसमें कुछ मदद कीजिये क्योंकि पिताजी की स्थिति बहुत खराब हो गई है ! उसके आग्रह पर मैंने तंत्र विधान की क्रिया से मारण तंत्र को काट दिया और इसके बाद भी मैंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि तंत्र काट दिया गया है लेकिन पिताजी के स्वस्थ होने में संदेह है और अंततः रात्रि 10:00 बजे उनकी मृत्यु हो गई !

तब मेरे मन में यह विचार आया कि मैं लोगों को यह अवगत करवाऊ कि मारण तंत्र के काटे जाने के उपरांत भी व्यक्ति क्यों मर जाता है ! जिस हेतु यह लेख मैं लिख रहा हूं !

मारण तंत्र की 9 विधियां हैं ! इनमें से किसी एक विधि का प्रयोग करके व्यक्ति के ऊपर मारण तंत्र का प्रयोग किया जाता है !

जब किसी व्यक्ति पर मारण तंत्र का प्रयोग किया जाता है ! तब उस तंत्र के प्रभाव से व्यक्ति की मानसिक तरंगे जो शरीर के विभिन्न ऑर्गन को नियंत्रित करने के लिए मस्तिष्क द्वारा प्रतिक्षण निकलती हैं ! उनमें अवरोध उत्पन्न होने लगता है ! परिणामत: शरीर का कोई विशेष आंतरिक अंग अपना सामान्य कार्य करना बंद कर देता है और धीरे-धीरे वह आतंरिक अंग मस्तिष्क से तरंगें न मिलने से खराब होने लगता है !

यदि तंत्र को तत्काल समझ कर उसको तत्काल काटा नहीं जाता है तो व्यक्ति का वह ऑर्गन नष्ट जाता है और जब तक तंत्र को समझ कर काटा जाता है ! तब तक शरीर का वह ऑर्गन पूरी तरह से नष्ट हो चुका होता है ! परिणाम स्वरूप यदि तंत्र को काटने में अनावश्यक विलंब हुआ है तो उस स्थिति में तंत्र को काटे जाने के उपरांत भी ऑर्गन फेल्योर से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है !

अत: मारण तंत्र का आभास होते ही किसी भी योग्य तांत्रिक से तत्काल उस मारण तंत्र को निष्क्रिय करवा लेना चाहिए जिससे कि शरीर के आंतरिक अंगों की कम से कम क्षति हो और जिस आंतरिक अंग की क्षति हुई है ! उसकी जांच करवा कर यथाशीघ्र आयुर्वेद या होम्योपैथ पद्धति से उसे ठीक करवाने की प्रक्रिया आरंभ करनी चाहिए ! जिससे कम से कम नुकसान में व्यक्ति स्वस्थ हो सके !

यही कारण है कि तंत्र का प्रयोग होने के बाद व्यक्ति जब तक समझ पाता है ! तब तक तंत्र व्यक्ति के शरीर के आंतरिक अंग को नष्ट कर चुका होता है और फिर तंत्र का प्रभाव समाप्त कर देने के उपरांत भी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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