लंकेश तंत्र ही मानव का कल्याण कर सकता है : Yogesh Mishra

श्रीलंका को भगवान शिव ने बसाया था ! शिव की आज्ञा पर विश्वकर्मा ने वहां पर एक सोने के महल का निर्माण किया था ! जिसे रावण के पिता ऋषि विश्रवा ने भगवान शिव से दान में मांग लिया था और अपने बड़े पुत्र कुबेर को दे दिया था ! लेकिन जब रावण ने कुबेर से उस पिता की संपत्ति में अपना व अपने भाईयों का अंश माँगा तो कुबेर ने मना कर दिया ! जिस पर रावण ने अपने व अपने भाईयों के अधिकार के लिये कुबेर को लंका से भगा दिया और खुद अपने भाईयों और बहनों के साथ उस सोने के महल में रहने लगा !

रावण एक अत्यंत लोकप्रिय शासक था ! उसने “रक्ष संस्कृति” की स्थापना की ! जिसका अर्थ था सभी की रक्षा हो ! क्योंकि उस समय वैष्णव शासक पूरी दुनियां में घूम घूम कर गैर वैष्णव का कत्लेआम कर रहे थे ! अत: सभी गैर वैष्णव अपनी रक्षा के लिये रावण की शरण में स्वत: ही आ रहे थे ! जो भी वैष्णव शासक इन गैर वैष्णव का शोषण करता रावण उसकी रक्षा करता ! इसीलिये रावण के अनुयायी इसे “रक्षा संस्कृति” कहते थे !

रावण राज्य में कभी कोई भी नागरिक अकाल मृत्यु से नहीं मारा और न ही कभी कोई प्राकृतिक आपदा आयी ! कहीं भी हत्या, डकैती, बलात्कार आदि नहीं हुआ करता था ! रावण के शासनकाल में सब तरफ संपन्नता थी ! लंका का हर आम नागरिक अपने गले में सोने के 10 तोले का शिवलिंग धारण करता था ! उसके राज्य में सभी को चिकित्सा आदि नि:शुल्क उपलब्ध थी !

 लंकावासियों की संपन्नता से देव राज इंद्र भी रावण से ईर्ष्या रखते थे ! रावण के सभी दरबारी रावण के विचारों का सम्मान करते थे ! रावण के राज्य में सूखा, अकाल, सुनामी, अग्निकांड जैसे प्राकृतिक आपदाएं कभी नहीं हुई क्योंकि उसने अपने राज्य में अत्यंत विकसित विज्ञान से इन प्राकृतिक आपदाओं को नियंत्रित कर रखा था ! इसीलिए कहा जाता था कि रावण ने अग्नि, जल, वायु, देवता, किन्नर, यक्ष, गंधर्व को ही नहीं बल्कि काल अर्थात मृत्यु को भी अपने नियंत्रण में कर रखा था !

रावण के इस अभूतपूर्व शासन सफलता का रहस्य था भगवान शिव द्वारा दिया गया “तंत्रज्ञान” ! जिस तंत्रज्ञान के कारण रावण ने अपने परिवार ही नहीं बल्कि अपनी समस्त प्रजा को भी प्राकृतिक आपदाओं से अभयदान दे रखा था !

 रावण ज्योतिष का बहुत बड़ा ज्ञाता था ! अतः उसके राज्य में होने वाली हर आपदा का उसे ज्योतिष गणना के द्वारा पूर्व अनुमान लग जाता था और वह शैव तंत्र अर्थात अत्यंत उन्नत विज्ञान की मदद से उन आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को पहले ही नियंत्रित कर लेता था !

 रावण का समस्त ज्ञान उसकी राष्ट्रीय भाषा तमिल में था ! जो लोकगीत के रूप में समस्त रक्ष संस्कृति के अनुयायियों के मध्य प्रचलित और विख्यातित था !

 जिसे राम के विजय के बाद पूरी तरह से इन्द्र वैष्णव आदि शासकों द्वारा नष्ट कर दिया गया ! किन्तु अभी भी वहां के प्राचीन परंपरागत लोकगीतों में रावण का वह “शैव तंत्र विज्ञान” आज भी जीवित है ! बस आवश्यकता है उसको समझने की क्योंकि वह विज्ञान ही मनुष्य को बहुत से प्राकृतिक आपदाओं से मुक्ति दिला सकता है !

 इस संदर्भ में मेरा शोध कार्य चल रहा है ! समय-समय पर मैं आपको रावण द्वारा रचित “शैव तंत्र विज्ञान” की जानकारी देता रहूंगा क्योंकि विश्व के प्राचीनतम ज्ञान में शैव तंत्र ही सबसे प्राचीन ज्ञान है ! जो वेदों से भी पुराना है !

 जिसे जानबूझकर वैष्णव लेखकों द्वारा समाज में विलुप्त कर दिया गया और आज उसी का परिणाम है कि पूरी दुनिया में मानवता सुकून के लिये भटक रही है ! जो उसे वेद भी नहीं दे पा रहे हैं ! इसलिए रावण द्वारा प्रचारित शैव तंत्र के सिद्धांतों को अपना कर आप अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं ! यह मेरा सुझाव है

क्योंकि श्री लंका का पिछले 3000 वर्ष का लिखित इतिहास उपलब्ध है ! जबकि वहां मानव बस्तियां के 1,25,000 वर्ष पूर्व के होने के प्रमाण मिले हैं ! जो प्रमाण वैष्णव इतिहास में कहीं नहीं मिलता है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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