विश्व सत्ता के षड्यंत्र से हम कैसे बचें : Yogesh Mishra

 विश्व सत्ता का विश्वव्यापी षडयंत्र जो आज पूरी दुनिया को अपने प्रभाव में लिये हुये है ! घर घर में लाशें गिर रही हैं, कहीं घर के बुजुर्ग मुखिया मर रहे हैं तो कहीं जवान बेटे ! अब तो विश्वव्यापी भूखमरी फैला कर इस मानवता के इतिहास की सबसे बड़ी हत्या की योजना बनायीं जा रही है ! विज्ञान द्वारा जलवायु परिवर्तन इसी षडयंत्र का हिस्सा है ! इससे बचकर निकलना तभी संभव हो सकेगा, जब हम विश्व सत्ता के कार्यपद्धती और उनके लक्ष्य को स्पष्ट रूप से समझ लेंगे !

 आज जो सबसे बड़ी आवश्यकता है, वह यह है कि हम विश्व सत्ता के षडयंत्र के विषय में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें और उसे सरल और सहज भाषा में अपने संपर्क के लोगों को अधिक से अधिक समझाने की कोशिश करें ! जिससे आम जनमानस यह समझ सके कि उनका मुकाबला किन महादुष्टों से है और वह किस तरह कार्य करते हैं ! यदि हम इन महादुष्टों के षडयंत्र से नहीं बच पाये तो वह किस स्तर पर पहुँच कर हमारा नुकसान कर सकते हैं ! इसकी जागरूकता फैलाना परम आवश्यक है !

 जब हम इन महादुष्टों के षडयंत्र की क्रमबद्ध जानकारी अपने आसपास के लोगों को देंगे ! तब उनके साथ चर्चा और परामर्श होगा ! उस चर्चा और परामर्श से लोगों में जागरुकता आयेगी और उस जागरूकता से एक समूह खड़ा होगा और वह समूह दूसरे समूह को जागरुक बनायेगा ! इस तरह पूरे विश्व में सैकड़ों समूह बनेंगे ! जो विश्व सत्ता के षड्यंत्र को आम जनमानस के सामने उजागर कर सकेंगे ! जिससे हमारी शक्ति बढ़ेगी और षडयंत्रकारी कमजोर पड़ेगे !

 किसी भी षड्यंत्रकारी का षड्यंत्र तभी सफल हो पाता है, जब हम उसकी जानकारी आम जनमानस को नहीं दे पाते हैं ! यदि आम जनमानस को किसी षड्यंत्रकारी के षड्यंत्र की जानकारी करवा दी जाये तो उस षड्यंत्रकारी को अपने षड्यंत्र की नीति में समय-समय पर परिवर्तन करना पड़ता है और वह स्थिति हमें अपने बचाव का मौका देती है !

 यह एक बौद्धिक खेल है ! इस खेल में यदि हम जीत गये तो हम और हमारी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित हो जाती हैं और यदि हम इस बौद्धिक खेल में हार गये तो हमारा वंश मूल सहित सर्वनाश हो जाता है !

 ऐसा नहीं है कि आज यह पहली बार हो रहा है ! इससे पहले भी इस तरह के सैकड़ों बौद्धिक खेल दुनियां में खेले गये हैं ! इतिहास गवाह है कि पूरे विश्व के मानवता के इतिहास में जो आज 14 विश्व युद्ध हुये हैं, उन सारे के सारे विश्व युद्धों की शुरुआत कहीं न कहीं बौद्धिक खेलों से ही हुई थी !

 जब तक षडयंत्रकारियों के इन खेलों को दूसरा पक्ष अर्थात आम जनता नहीं समझ पाया तब तक वह लोग अपना खेल खेलते रहे और जनता उनके माया जाल में फंसी रही लेकिन जब जनता उनके षड्यंत्र के खेल को समझने लगी, तब उनके षड्यंत्र कार्यों का विरोध शुरू हो गया और समय-समय पर मानवता के इतिहास में बड़े संघर्ष हुये जिन्हें विश्व युद्ध का नाम दिया गया !

आज भी मानवता की रक्षा के लिये अभी तत्काल एक विश्वयुद्ध की आवश्यकता है ! इसमें हम किस पक्ष से लड़ेंगे यह हमारा विवेक है ! लेकिन इस विश्वयुद्ध में भागीदारी सभी को करनी पड़ेगी ! इसके लिये हमें मानसिक रूप से तैयार होना पड़ेगा और यदि हम इस विश्वयुद्ध में भागीदारी नहीं करते हैं या इसे टालने का प्रयास करते हैं, तो स्पष्ट मान लीजिये कि हम और हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित नहीं है ! अब यह युद्ध इस ईश्वरीय व्यवस्था का अनिवार्य अंश है !

 इसलिये सबसे पहले तो विश्व सत्ता के षड्यंत्र को समझिये इसके बाद अपने लोगों को समझाइये ! फिर समूह का निर्माण करिये और इस तरह एक समूह दूसरे समूह का सहयोग करे ! जिससे कि इन विश्व सत्ता के षड्यंत्रकारिर्यों के षड्यंत्र को असफल किया जा सके ! यह ईश्वरीय का कार्य है ! इसलिये इसमें लगना सभी का कर्तव्य ही नहीं दायित्व भी है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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मोबाईल : 9453092553

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