शिव महाकाल कैसे हैं : Yogesh Mishra

तंत्र के माध्यम से ही प्राचीनकाल से घातक किस्म के हथियार बनाए जाते थे !  जैसे पाशुपतास्त्र, नागपाश, ब्रह्मास्त्र आदि आदि ! जिसमें यंत्रों के स्थान पर मानव अंतस चेतना में रहने वाली विद्युत शक्ति का प्रयोग किया जाता था !

जिससे प्रकृति से सूक्ष्म से सूक्ष्मतम परमाणु की ऊर्जा का प्रयोग व्यक्ति अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिये करता था ! इसी स्थिति का परिणाम था कि मनुष्य अपनी इच्छा मात्र से पदार्थों की रचना, परिवर्तन और विनाश का कार्य बड़ा भारी भारी यंत्रों से नहीं बल्कि मात्र तंत्र की सहायता से मानसिक शक्तियों से कर सकता था !

तंत्र विज्ञान के इस रहस्य पूर्ण साधना का आज भी प्रमाण ‘सावित्री तंत्र विज्ञान’ तंत्र साधना पद्ध्यति, वसिष्ठ संहिता, सनक संहिता, सनंदन संहिता, शुकसंहिता सनतकुमार संहिता, ‘तंत्रराज’ आदि ग्रंथों में मिलता है !

तंत्र-शास्त्र में जो पंच प्रकार की साधना बतलाई गई है, उसमें मुद्रा साधन बड़े महत्व का और श्रेष्ठ है ! मुद्रा में आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि योग की सभी क्रियाओं का समावेश होता है ! जिसे कालांतर में वैष्णव ने अष्टांगयोग के नाम पर हड़प लिया !

यह सभी क्रियायें तंत्र में जीवनी ऊर्जा के विस्तार द्वारा जीवनी शक्ति को विकसित करने की है ! जिससे मन चाहे परिणाम प्राप्त किये जा सकें !

एक्यूपंचर, एक्यूप्रेशर, सुगंध चिकित्सा, ध्वनि चिकित्सा, औरा हीलिंग, आदि आदि आधुनिक मानसिक शक्तियों से स्वस्थ करने की सभी प्रक्रियायें मूलतः तंत्र का ही अंश हैं !

विश्व के सभी आधुनिक घातक हथियार जो मनुष्य की विकृत सोच के कारण आज मानवता के लिए खतरा बन गये हैं ! वह सभी बारूद से लेकर परमाणु हथियार तक सभी कुछ हथियारों का प्रेरणा स्रोत तंत्र ही है !

 प्राचीन काल से ही तंत्र विद्या द्वारा इसी तरह के घातक हथियारों का प्रयोग मानसिक शक्तियों से किया जाता रहा था ! कच्छ. बलूचिस्तान. अरब, आस्ट्रेलिया आदि के रेगिस्तान इसके प्रमाण हैं ! जिनके कारणों को अब आधुनिक विज्ञान द्वारा खोजा जा रहा है !

 मानसिक शक्तियों को ऊर्जा विज्ञान और आधुनिक विज्ञान को शास्त्रों में तात्विक विज्ञान कहा गया है ! इससे स्पष्ट है कि सृष्टि में कुछ भी नया नहीं है ! बस विज्ञान का स्वरूप बदलता रहता है ! जिससे समाज को मूर्ख बनाने के लिये अब अविष्कार का नाम दिया गया है !

 इसका यह भी प्रमाण है कि भारत की पांडुलिपियों को लूटे बिना पश्चिम एक भी वैज्ञानिक पैदा नहीं कर पाया और पश्चिम का सारा का सारा विज्ञान शुरू हुई तब हुआ जब वह भारत के ऋषि मुनियों की धरोहर को लूट कर ले गये ! जिनमें तंत्र का गूढ़ रहस्य छिपा था !

 अतः इस तरह हम यह कह सकते हैं कि तंत्र ही आधुनिक हथियारों का मूल प्रेरणा स्रोत है ! इसीलिए भगवान शिव को मृत्यु का पर्याय महाकाल भी कहा गया है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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मोबाईल : 9453092553

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