वैष्णव शासक जन्मेजय के शासन में शैव उपासक नागवंशियों का पलायन : Yogesh Mishra

यह बात उस समय की है, जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था ! शैव उपासक कौरवों के हार के कारण धृतराष्ट्र अपना राजपाठ वैष्णव उपासक युधिष्ठिर को सौंप कर, अपनी पत्नी गांधारी और छोटे भाई विदुर सहित जंगल में जाकर तपस्या करते हुये, भीषण अग्निकांड में जलकर मर चुके थे !

कृष्ण का कुल वंश भी गृह कलह के कारण मुसल युद्ध में अपने ही परिजनों से लड़ कर ख़त्म हो चुका था और कृष्ण भी एक बहेलिये के हाथों मारे जा चुके थे ! द्वारिका नगरी भूकम्प के कारण समुद्र में डूब चुकी थी और द्वारिका की महिलाओं का क्षेत्रीय भीलों द्वारा अपरहण कर लिया गया था ! चक्रवर्ती सम्राट युधिष्ठिर और अर्जुन भी उन महिलाओं की रक्षा नहीं कर पाये थे !

काल के प्रवाह में युधिष्ठिर सहित पाण्डव वृद्ध हो गये थे और वन गमन के समय युधिष्ठिर के पत्नी देविका से उत्पन्न पुत्र “धौधेय” या द्रौपदी से पुत्र ‘प्रतिविंध्य’ के स्थान पर अर्जुन और कृष्ण की बहन सुभद्रा से उत्पन्न पुत्र अभिमन्यु के पुत्र परीक्षत को मात्र 24 वर्ष की आयु में कुरुवंश की राज सत्ता सौप कर पाण्डव स्वर्ग जा चुके थे !

वैसे अर्जुन के द्रौपदी के अलावा सुभद्रा, उलूपी और चित्रांगदा नामक तीन पत्नियां और थीं ! सुभद्रा से अभिमन्यु के अलावा उलूपी से इरावत, चित्रांगदा से वभ्रुवाहन नामक अभिमन्यु से बड़े दो पुत्रों का जन्म हुआ था । फिर भी सत्ता वैष्णव होने के नाते परीक्षित को मिली थी !

ख़ैर अपने विषय की बात करते हैं !

जब परीक्षत राजा बने तो उन्हें गुप्तचरों से पता चला कि पूर्व में उनके पिता अर्जुन द्वारा जो खांडव प्रदेश को श्रीहीन कर दिया गया था ! जिसमें अनेकों शैव उपासकों की जातियों का सर्वनाश किया गया था ! इन्हीं शैव जातियों में एक नाग जाति भी थी ! जिसने अपने कुल कर सर्वनाश का बदला कुरुवंशजों से लेने की ठानी थी !

जबकि कृष्ण ने इस नागवंश की कन्या “उलूपी” जो कि ऐरावत वंश के राजा नागराज वासुकी और राजमता विषवाहिनी की दत्तक पुत्री थी, के साथ अर्जुन का विवाह करावा कर उनके मध्य मैत्री सम्बंध स्थापित करने का प्रयास किया था ! लेकिन शैव उपासक नागों के प्रतिशोध की वृति के कारण अभिमन्यु के वैष्णव पुत्र परीक्षित को इन्हीं नागवंशियों ने मौका देख कर मार डाला और कुरुवंश के सिंघासन पर कब्ज़ा करने का असफल प्रयास किया ! जिसके उत्तर में परीक्षित पुत्र जन्मेजय ने इस शैव उपासक नाग जाति को भारत वर्ष से हमेशा के लिये खत्म करने का संकल्प लिया !

उस जमाने में वैष्णव शासक अपने राजकीय वर्चस्व की प्रतिष्ठा के लिये राजा जो कार्य किया करते थे उसे “अश्वमेघ यज्ञ” कहा जाता था ! जन्मेजय ने भी यहीं यज्ञ किया !  जिसमें युद्ध करके उसने नागवंश के प्रमुख राजा कुलिक, अनन्त, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़ आदि का या तो वध कर दिया या फिर उन्हें सदा के लिये भारत भूमि से खदेड़ दिया ! जिससे भयभीत अन्य शैव उपासक नागवंश के बचे हुये शासक और नागरिक आर्यावर्त को छोड़ कर पश्चिम की तरफ यहाँ से बहुत दूर वर्तमान अफ्रीका के घने जंगलों की ओर चले गये !

इस तरह वैष्णव शासक जन्मेजय के शासन काल में नागवंशीय शैव उपासकों का भारत के कुरु साम्राज्य से पलायन हो गया !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये

www.sanatangyanpeeth.in

Share your love
yogeshmishralaw
yogeshmishralaw
Articles: 2459

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *