सम्राट अशोक के घृणित कार्य : Yogesh Mishra

303 ईसा पूर्व में ग्रीक आक्रमणकारियों को धता दिखाते हुये चन्द्रगुप्त मौर्य ने आचार्य चाणक्य के मार्गदर्शन में काबुल, हेरात, कन्धार, बलूचिस्तान, पंजाब, गंगा-यमुना का मैदान, बिहार, बंगाल, गुजरात तक तथा उत्तर में कश्मीर से कर्नाटक तक अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था !

चन्द्रगुप्त मौर्य के मरने के बाद रहीसी में पले बढ़े उनके पुत्र बिन्दुसार ने सत्ता हांसिल करते ही सबसे पहले आचार्य चाणक्य की ही हत्या का षडयंत्र रच डाला ! जिस वजह से आचार्य चाणक्य को दक्षिण भारत केरल भाग जाना पड़ा ! जहाँ उन्होंने अज्ञात अवस्था में अपना शरीर छोड़ दिया ! अय्याश बिन्दुसार अफगानिस्तान से बंगाल तक अपने राज्य को संभाल नहीं पाया और अति अय्याशी के चले 16 पत्नियाँ से 101 पुत्रों को जन्म देकर वह 274 ईसा पूर्व बीमारी से भारत-अफगानिस्तान बॉर्डर पर मर गया !

अपनी मृत्यु से पहले उसने अपने प्रिय बेटे सुशीमा को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया ! पिता के मरने के बाद जब सुशीमा मगध पटना आया ! तो अशोक ने ग्रीक योद्धाओं की मदद से सुशीमा सहित अपने 99 भाइयों की तथा सत्ता के 500 से अधिक पिता के प्रति वफादार अधिकारियों की अपने हाथ से हत्या कर दी और मगध की गद्दी पर कब्ज़ा कर लिया !

अशोक ने अपने सबसे छोटे भाई तिष्य को इसलिये छोड़ दिया कि उसने अपने भाइयों की मुखबरी करके उनकी हत्या में अशोक की बहुत मदद की थी ! अशोक का यह निरंतर हत्या का दौर अपने भाइयों के साथ 4 साल तक चलता रहा ! जिसमें आम आवाम के भी तीन लाख से अधिक लोग मारे गये !

तब अशोक 270 ईसा पूर्व मगध का राजा बन गया ! इसीलिये उसे बौद्ध ग्रंथों में चंडाशोक कहा गया ! अर्थात चंडी के समान क्रूर, हिंसक जो हर स्थान पर हर समय शोक ही फैलता हो !

कालांतर में बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव से प्रभावित होकर अशोक ने अपने आरंभिक जीवन के पापों को छिपाने के लिए बौद्ध धर्म के प्रचार में युद्धों में लूटा हुआ धन बौद्ध विहारों पर लुटा कर प्राश्चित किया ! जिस कारण उसे में डाल दिया गया था ! एक दिन उसके पास एक बौद्ध भिक्षु भिक्षा मांगने गया तो उसने कहा कि मेरे पास कुछ भी नहीं है ! मेरे पास तो यहाँ एक फल है, और उसने वही दे दिया !

देश के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में भी सम्राट अशोक के उजले पक्ष को ही शामिल किया गया है ! श्रीलंका के तीन बौद्ध ग्रंथो दीपवंश महावंश, अशोकावदान और तिब्बती लेखक तारानाथ के ग्रंथ से यह ज्ञात होता है कि सम्राट अशोक बहुत ही बदसूरत था ! उसके चेहरे पर सफ़ेद दाग और चोट के निशान थे ! जिस वजह से उसे कोई प्यार नहीं करता था !

अतः उसने अपनी हवस को मिटाने के लिये अपने जीवन काल में तीन हजार से अधिक लड़कियों से बलात्कार किया ! उसके अंत:पुर यदि कोई उससे सम्भोग से मना करता था या उसकी कुरूपता की हंसी उड़ाता था तो उस महिला को अंत:पुर में ही सभी महिलाओं के सामने जिंदा जलवा दिया जाता था ! इसीलिये उसे बौद्ध ग्रंथों में कामशोक भी कहा गया है अर्थात जो काम वासना के लिये समाज को शोक में डाल दे !

वह आरंभिक जीवन से बहुत ही कामुक था ! वह बहुत ही क्रूर था ! उसने अपने राजनीतिक लाभ के लिये अपने विरोधी अनेकों बौद्ध भक्षुओं की भी हत्या करवाई थी ! बाद में वह धम्म अशोक बन गया था !

हमारे यहां राजनीतिक कारणों से क्रूर, अय्याश, तानाशाह, राष्ट्रद्रोही अशोक को बहुत महत्व दिया गया और प्रपोगंडा किया गया कि कलिंग के युद्ध के बाद यह अहिंसक हो गया था और उसने निर्णय लिया था कि अब यह कभी युद्ध नहीं करेगा ! अत: भारत सरकार ने भी अशोक के स्तंभ पर बने शेर को अपना शासकीय निशान बना लिया ! जबकि इसके पीछे की वजह हरिजन वोट बैंक था ! जो अम्बेडकर के प्रभाव में एक अलग समुदाय के रूप में समाज में खड़ा हो गया था !

वृद्ध अवस्था में अशोक द्वारा अपने बेटे कुणाल की ऑंखें निकाल लेने पर जनता ने अशोक के खिलाफ विद्रोह कर दिया और उसे राज सिंघासन से अपदस्थ कर दिया ! वह अपनी प्राण रक्षा करता हुआ तक्षशिला पहुंचा ! जहाँ उसकी अत्यंत दैनीय हालत में बौद्ध भिक्षु के रूप में मौत हो गयी और जनता ने उसके पुत्र अंधे कुणाल को राजा घोषित कर दिया !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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