रावण नीति के 10 अध्याय : Yogesh Mishra

 रक्ष संस्कृति का राजा रावण जिसने इस पृथ्वी पर एक नई जीवन शैली की स्थापना की थी, जिसे कालांतर में “रक्ष संस्कृति” कहा गया ! ऐसे ही विद्वान नीतिकार रावण ने इस समस्त पृथ्वी पर अपने साम्राज्य को चलाने के लिए 10 नीतियों का सहारा लिया था !

 यह दसों नीतियां मनोविज्ञान की दृष्टि से इतनी व्यावहारिक हैं, कि यह हर काल में उपयोगी हैं !

 भगवान राम भी स्वयं रावण के नीति व्यवहार से इतना प्रभावित थे कि उन्होंने रावण को हराने के बाद जब रावण मृत्यु शैया पर था, तो उन्होंने अपने घायल छोटे भाई लक्ष्मण को नीति का ज्ञान लेने के लिए रावण के पास भेजा था !

 इसलिए रावण के व्यवहारिक नीति ज्ञान को सामान्य ज्ञान मानने की त्रुटि नहीं करना चाहिए ! रावण का नीति ज्ञान चाणक्य से भी श्रेष्ठ और व्यवहारिक था !

 इसी वजह से एक सामान्य ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुआ गरीब ब्राह्मण का बच्चा अपने नीति ज्ञान के कारण आधे से अधिक पृथ्वी का स्वामी बना और उसने अपने शक्ति और सामर्थ्य से भगवान शिव के पार्षद मंडल में भी स्थान प्राप्त कर लिया था !

 रावण के नीति ज्ञान से इंद्र आदि देवता भी इतना भयभीत थे कि उन्हें यह लगने लगा कि ऐसा ही चलता रहा तो इस पृथ्वी पर रावण की रक्षा संस्कृति बहुत जल्दी ही वैष्णव संस्कृति को नष्ट कर देगी !

 इसी कारण से अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए 300 से अधिक वैष्णव राजाओं ने मिलकर इंद्र के नेतृत्व में और राम की ओट में रावण से महासंग्राम किया ! जिसमें अनेक छल के कारण अन्तः भारी क्षति के बाद राम को विजय प्राप्त हुई !

 भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति रावण के नीतियों का सहारा लेकर पुनः वैष्णव समाज के लिए खतरा न बन जाये, इस भय से वैष्णव लोगों ने रावण के नीति ज्ञान को सैकड़ों साल के प्रयास के बाद जनसामान्य के चिंतन से नष्ट कर दिया !

 जैसे उदाहरण के लिए वर्तमान समय में हिटलर ने जिन नीतियों का सहारा लेकर वह जर्मन का चांसलर बना और उसने जर्मन के देशद्रोही यहूदियों को खत्म कर दिया था ! जिनके कारण प्रथम विश्व युद्ध में जर्मन की साम्राज्यवादी शक्तियों के सामने पराजय हुई थी !

उसका बदला हिटलर ने मात्र 20 वर्ष के अन्दर ले लिया था और ब्रिटेन को तबाह कर दिया था ! जिस कारण ब्रिटेन के कमजोर होने पर भारत को भी तथाकथित आज़ादी मिल गयी !

उसी हिटलर की नीतियों का सहारा लेकर दोबारा कोई दूसरी महाशक्ति यहूदियों के खिलाफ खड़ी न हो सके, इसके लिए आज भी जर्मन के अंदर हिटलर के विषय में बात करना ! हिटलर के चिन्ह को प्रयोग करना या हिटलर की नीतियों पर चर्चा करना दंडनीय अपराध है !

ठीक इसी तरह वैष्णव के लिए कोई दूसरा रावण की तरह नीति का सहारा लेकर पुनः समस्या पैदा न कर दे, इस हेतु रावण की नीतियों को जनमानस के पटल से मिटा दिया गया !

 लेकिन यदि आप लोगों की इच्छा होगी तो कभी इस विषय पर विशेष वक्तव्य श्रृंखला आरंभ की जाएगी !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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