यह समाज में बहुत बड़ी भ्रांति है कि पढ़े-लिखे लोग ही संपन्न हो सकते हैं ! जबकि व्यवहार में देखा जाता है कि किसी भी संपन्न व्यक्ति के लिये उसकी शिक्षा मात्र उसकी सम्पन्नता में सहायक है ! उसकी संपन्नता का आधार नहीं है ! जिसे भ्रमवश लोग संपन्नता का आधार मान रहे हैं !
संपन्न होना एक व्यावहारिक कुशलता है ! जिसकी कोई भी शिक्षा पूरी दुनियां में कहीं नहीं दी जाती है ! पूरी दुनिया में आज आपको जो शिक्षा दी जाती है, वह बस सिर्फ बौद्धिक मजदूर बनने के लिए दी जाती है ! इसीलिए देश की आजादी के 75 साल बाद भी भारत में 95% शिक्षित लोग बौद्धिक मजदूर हैं अर्थात गरीब हैं !
4.5% लोग आर्थिक रूप से सामान्य वर्ग अर्थात मिडिल क्लास में आते हैं ! दशमलव 5% लोग ही ऐसे हैं जिन्हें आप संपन्न अर्थात अपर क्लास में गिना जा सकता है !
उन्हें भी 90% लोग कहीं न कहीं या तो सरकारी नौकरी कर रहे हैं, या फिर सरकार से लाभान्वित होने के लिये किसी न किसी रूप में सरकार की कृपा से जुड़े हैं !
अर्थात कुल कहने का तात्पर्य यह है कि संपन्नता के सिद्धांतों की समझ न होने के कारण भारत में जन्म लेने वाला आम आदमी गरीब पैदा होता है और मोटा पैसा खर्च करके शिक्षित होने के बाद भी गरीबी में जीवन भर संघर्ष करता है और अपने आने वाली तथाकथित शिक्षित पीढ़ियों को विरासत में गरीबी ही देकर चला जाता है !
इसलिए यदि आप गरीबी के कुचक्र से मुक्त होना चाहते हैं, तो आपको संपन्नता के विज्ञान को समझना होगा !
जिस संदर्भ में सनातन ज्ञान पीठ के संस्थापक श्री योगेश कुमार मिश्र एक विशेष सत्र युवाओं के लिए आरंभ करने जा रहे हैं ! जिसमें भाग लेने वाले सभी युवाओं से सम्पन्नता के रहस्य पर संवाद किया जायेगा ! जिससे युवाओं में प्रतिभा के निखार के साथ धन की समझ भी विकसित हो सके !
यदि आप इस सन्दर्भ में और अधिक जानकारी चाहते हैं, तो कार्यालय में संपर्क कीजिए !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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