अपना सर्वस्व त्याग कर भारत में विश्व को दिशा देने वाले अनेक महान आध्यात्मिक संत हुए हैं ! पश्चिम जगत में भी बहुत से ऐसे विचारक हुए जिनके विचारों से घबरा पश्चिम जगत के शासकों ने उन्हें या तो क्रूस पर चढ़ा दिया और या फिर जहर देकर मार डाला !
किंतु इन सभी में एक बात सामान्य थी, वह यह कि इनमें से कोई भी अवसरवादी नहीं था और न ही सत्य को समाज के सामने तोड़ मरोड़ कर पेश करता था !
पर अब मानसिक विकृति के साथ चिंतन का भी दौर बदल गया है ! आज अध्यात्म के नाम पर सोशल मिडिया की मदद से विशुद्ध लफंगाई हो रही है !
तथाकथित यह लफंगे आध्यात्मिक गुरु जिन्हें न तो सत्य की अनुभूति है और न ही उनमें इतना साहस कि वह समाज के सामने सत्य को प्रकट कर सकें !
बल्कि सत्यता तो यह है कि यह तथाकथित आध्यात्मिक गुरु बड़े बड़े घरानों के बच्चों को बेवकूफ बनाकर बहला-फुसलाकर अपने आर्थिक और शारीरिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस्तेमाल करते हैं !
और जब यह बच्चे 10-15 साल के शोषण के बाद उनके आर्थिक और शारीरिक भूख को मिटाने में सक्षम नहीं बचते, तब इन्हें या तो मार दिया जाता है या फिर बेसहारा समाज में छोड़ दिया जाता है !
जिनकी कोई भी खबर लेने वाला भी नहीं होता है, क्योंकि तब तक इनका अपना परिवार भी इन्हें भूल चुका होता है और यह लोग तथाकथित आध्यात्मिक उपलब्धि के चक्कर में अपना कोई परिवार बना नहीं पाते हैं !
उस समय ऐसे भटके हुए बच्चों के पास प्राय: आत्महत्या कर लेने या नशे में अपनी जिंदगी को डुबो देने के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं बचता है !
पश्चिम के जगत में परिवार की अवधारणा ही अधूरी है ! अतः वहां पर पैदा होने वाले बच्चे अपने माता-पिता के नियंत्रण में नहीं होते हैं ! उनकी देखा देखी भारतीय परंपरा को तोड़ते हुए भारत में भी कुछ तथाकथित आधुनिक बच्चे अध्यात्म के नाम पर इस लफंगाई के गिरोह में शामिल हो जाते हैं और जब तक वह जागते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है !
जो बच्चे अपने मां बाप के न हुये उनका हश्र भी ओशो जैसा ही होता है कि उनको उन्हीं के आश्रम में उन्हीं के शिष्यों द्वारा जहर देकर मार दिया जाता है और उनकी अपनी सगी मां जो उस समय आश्रम में ही थीं उनको सूचना भी नहीं मिलती ओशो की अंत्येष्टि कर दी जाती है !
ओशो की महिला सचिव उनकी संपूर्ण संपत्ति लेकर ओशो के प्लेन से ही स्विजरलैंड भाग जाती हैं और ओशो के समर्पित शिष्यों को धक्के मार कर उन्हीं के आश्रम से निकाल दिया जाता है ! जिस आश्रम को कभी उन्होंने बड़े अरमान से बनाया था !
आज यह तथाकथित ओशो के समर्पित शिष्य अपने आध्यात्मिक अधिकार के लिए मुंबई हाईकोर्ट में अनेकों मुकदमे लड़ रहे हैं !
इसलिए अध्यात्म को समझो और उसे सही रूप में अपनाओ ! अपने घर परिवार, माता-पिता, पत्नी, बच्चों के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करो और अध्यात्म के नाम पर लाफंगई फैलाने वालों से दूर रहो !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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