भगवान श्री राम के जीवन परिचय पर आज तक पृथ्वी के अलग अलग भूखंडों में 300 से अधिक रामायण विद्वानों द्वारा लिखी गई हैं !
जिससे स्पष्ट है कि भगवान श्री राम सदैव से मानवता के लिए एक आदर्श राजा के रूप में रहे हैं !
लेकिन ताज्जुब इस बात पर है कि इतनी रामायणों में कोई भी रामायण अपने आप में संपूर्ण नहीं है !
अर्थात सभी रामायण अधूरी तथा प्राय: अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों पर मौन हैं !
जैसे कि भगवान श्री राम का राज्याभिषेक 41 वर्ष की आयु में हुआ था और साहित्य के अनुसार उन्होंने 11000 वर्ष तक पृथ्वी पर शासन किया था !
महत्वपूर्ण बात किया है कि विभिन्न रामायण का अधिकांश हिस्सा भगवान श्री राम के जन्म से लेकर उनके राज्य अभिषेक तक ही विस्तार से लिखा गया !
जीवन के शेष हिस्से को बहुत संक्षेप में विद्वानों द्वारा समेटने का प्रयास किया गया है !
विषय यह है कि जब 41 वर्ष की आयु तक भगवान श्री राम ने इतने महत्वपूर्ण कार्य किये तो निश्चित रूप से 41 वर्ष की आयु के बाद के 10959 वर्षों में भी उन्होंने बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए होंगे ! जिनका वर्णन दुनिया की किसी भी रामायण में संग्रहित क्यों नहीं किया गया है !
इससे प्रतीत होता है कि भगवान श्री राम के जीवन परिचय पर साहित्य लेखन ईमानदारी के साथ नहीं हुआ है और जब किसी व्यक्तित्व लेखन पर लेखक ईमानदार न हो तब उस साहित्य की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाती है !
मेरे निजी मत के अनुसार भगवान श्री राम के 10959 वर्षों के कार्यों पर भी विस्तृत शोध होना चाहिये ! आखिर राम को रावण के वध के बाद हत्याहरणी नामक स्थल पर रावण के वध का प्राश्चित क्यों करना पड़ा !
राम के राज्याभिषेक के बाद उनके कुल गुरु वशिष्ठ ने अयोध्या क्यों त्याग दी !
भगवान को अपने अनिंद्रा और अवसाद की चिकित्सा ऋषिकेश जा कर क्यों करवानी पड़ी !
और सीता को भू समाधि (कुएं में कूद कर आत्म हत्या ) क्यों करनी पड़ी !
भगवान श्री राम को स्वयं सरजू में जल समाधि अर्थात आत्महत्या क्यों करनी पड़ी !
रावण वध के बाद अयोध्या श्रीहीन कैसे हो गयी ! वहां देवताओं ने आना जाना क्यों बंद कर दिया !
राम के अगली पीड़ी के विवाह सम्बन्धों के लिये भी अन्य क्षत्रियों ने राम के कुल का बहिस्कार क्यों किया था ?
राम के अश्वमेघ यज्ञ का योग्य ब्राह्मणों ने बहिस्कार क्यों किया ?
आखिर भगवान श्री राम का सम्पूर्ण जीवन इतना दुखद क्यों रहा ! जबकि उन्होंने तो रावण का वध मानवता की रक्षा के लिये किया था !
क्यों किसी भगवान/देवता ने उनके कठिन समय में उनकी मदद क्यों नहीं की !
यह भी गहन शोध का विषय है !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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