गुरु पूर्णिमा बीत गई है, किन्तु बहुत से तथाकथित धार्मिक आश्रमों में अभी तक शिष्यों को बुला बुला कर उनसे गुरु दक्षिणा लेने का कार्यक्रम चल रहा है ! जिसकी तैयारी 6 महीने पहले से लगभग सभी आश्रमों में की जाती है !
अब प्रश्न यह है कि जब गुरु ही माया मोह और संग्रह से ऊपर नहीं उठ पाया तो उसका अनुगमन करने वाले शिष्य कैसे माया मोह से दूर होंगे !
या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो भगवा आडंबर पहनकर बैठे हुए मठ मंदिरों में तथाकथित धर्म गुरु और कथावाचक क्या वास्तव में वही ज्ञान दे रहे हैं, जो उन्होंने अपने जीवन में अनुभूत किया है !
इसका सीधा सा जवाब है नहीं
आज धर्म एक धंधा है ! अब राम और कृष्ण के महान कार्य अनुगमन का विषय नहीं, बल्कि कथावाचकों द्वारा समाज को ठगने का विषय बन गये हैं !
और तथाकथित ढोल मजीरा पीटकर कथा सुनाने वाले अल्प ज्ञानी अब धर्मगुरु बन गए हैं ! जिन्हें किसी जमाने में राजा का गुणगान करने वाला “भाट” कहा जाता था ! जिनका काम मनोरंजन करके जीविकोपार्जन करना होता था !
आज यही मनोरंजनकारी रंग-बिरंगे कपड़े पहन कर बड़े-बड़े मंचों पर बैठकर मोटी रकम लेकर कथा वाचन करने के साथ-साथ अपने चेलों की संख्या बढ़ाने का विशेष कार्य कर रहे हैं, क्योंकि भगवान के नाम पर समाज को ठगा जाना सबसे आसान कार्य है और इसमें कोई जवाबदेही भी नहीं है !
इन कथावाचकों की निगाह सदैव समाज के संपन्न परिवार के व्यक्तियों पर रहती है, जो भावुकता वश भगवान के नाम पर अपने मेहनत से अर्जित धन का एक अंश इन तथाकथित धर्म गुरुओं को बिना किसी संघर्ष के आसानी से दे देते हैं !
आज इसी मंशा से लगभग हर धर्म गुरु अपने चेलों की संख्या को बढ़ाने में लगे हुये हैं ! जिससे धर्म ही नहीं समाज का भी बहुत तेजी से विकृत पतन हो रहा है !
इसी वजह से विश्व के दूसरे धार्मिक समूहों के सामने हिंदू निरंतर निर्बल और असहाय होता चला जा रहा है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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