हमें गरीब कौन बनाता है ? यह एक बहुत गहरा प्रश्न है !
प्राय: लोग आरोप के तौर पर अपनी गरीबी के लिए राजनेताओं, आर्थिक नीतिकारों या शासन-प्रशासन को दोषी मानते हैं !
लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है ! हम अपनी गरीबी के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं ! क्योंकि विश्व के किसी भी विश्व विद्यालय में अमीर बनने की शिक्षा नहीं दी जाती है !
और हम अपने जीवन में अक्षर ज्ञान को ही सम्पूर्ण शिक्षा मानकर बड़ी-बड़ी डिग्रियों लेकर भी अधूरी शिक्षा के दुश्चक्र में फसे रहते हैं !
महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब इस आर्थिक युग में मनुष्य का संपूर्ण जीवन “अर्थ” की धुरी के आसपास ही घूमता है, तो हमें पूरे जीवन अर्थ के संदर्भ में शिक्षित क्यों नहीं किया जाता है ?
बल्कि इसके विपरीत हमें गुमराह किया जाता है कि अच्छी और उच्च शिक्षा से व्यक्ति को संपन्नता प्राप्त होती है ! जबकि हमारी संपन्नता में शिक्षा मात्र हमारी सहायक है !
और व्यवहारिक जगत में भी देखा जाता है कि बहुत से व्यक्ति अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी प्राय: गरीब ही देखे जाते हैं !
अर्थात कहने का तात्पर्य है कि हमारी संपन्नता का रहस्य परंपरागत शिक्षा में नहीं बल्कि “आर्थिक शिक्षा” में छिपा हुआ है, जो शिक्षा हमें पूरे जीवन में कभी भी नहीं दी जाती है !
इसके पीछे कारण यह है कि विश्व के विकसित देश हमें “बौद्धिक मजदूर” की तरह प्रयोग करना चाहते हैं ! वह यह नहीं चाहते हैं कि हमारी बुद्धि “अर्थ” के संदर्भ में इतनी विकसित हो कि हम उनकी प्रतियोगिता में खड़े हो सकें !
लेकिन अब यह वैश्विक षड्यंत्र अधिक दिन तक नहीं चलेगा ! सनातन ज्ञान पीठ ने यह निर्णय लिया है कि आने वाली पीढ़ियों को वैश्विक स्तर पर अपनी संपन्नता के लिये विकसित और प्रशिक्षित करेगा !
इस संदर्भ में एक विस्तृत कार्यशाला को आरंभ किया जा रहा है ! जिसमें कोई भी व्यक्ति प्रवेश लेकर अपनी आर्थिक संपन्नता को विकसित कर सकता है !
और अधिक जानकारी के लिये आप कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं !
कार्यालय का संपर्क नम्बर 94530 92553 है !
धन्यवाद
