शैव साधक की दिनचर्या वैष्णव साधकों से एकदम अलग होती है ! वैष्णव दूसरों मनुष्यों के बनाये नियम से जीते हैं जबकि शैव साधक प्रकृति का अनुकरण करते हैं !
शैवों के अनुसार यह पिण्ड शरीर ईश्वर का दिया वरदान स्वरूप है, इसलिये इसे प्रकृति के अनुरूप रखना चाहिये ! न अधिक खाना चाहिये न ही अनावश्यक पंचांग अनुसार व्रत रहकर इसे कष्ट देना चाहिये !
बल्कि अपनी योनियों के जीव – जंतु, पशु – पक्षी, वनस्पति की तरह ईश्वर की इच्छा पर अपने मौज में रहना चाहिये !
ईश्वर के हर सहयोग के लिये उसे धन्यवाद करना चाहिये और बिना किसी भय के ईश्वर की इच्छा पर जीवन यापन करना चाहिये !
इसी विषय पर एक विस्तृत प्रश्नोत्तर सत्र गुरुदेव श्री योगेश कुमार मिश्र जी के साथ आज 20 दिसम्बर 2025 को सायंकाल 08:00 बजे ओन लाईन डिजिटल आयोजित किया गया है !
जिस बैठक में सभी साधकों के लिये प्रवेश की अनुमति है !
सचिव
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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