शैव ग्राम का दिव्य स्वरूप

शैव ग्राम भारत में एक “निष्काम कर्म” आधारित “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सेवा परमो धर्म:” के दर्शन पर आधारित दिव्य साधना एवं जीवनचर्या स्थल होगा।

प्रत्येक साधक को आर्थिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दी जायेगी, लेकिन फिर भी साधकों में अपना पूरा जीवन लोक कल्याण के लिये समर्पित करने की सच्ची इच्छा और प्रेरणा शिव की कृपा से ही आती है।

संस्थान का यह मानना है कि जब आजीविका की चिंता खत्म हो जाती है, तब मनुष्य अपने सर्वोच्च क्षमता का समाज में प्रदर्शन कर पाता है और उसके लिये इस पृथ्वी पर सर्व श्रेष्ठ जगह है “शैव ग्राम” ।

सनातन ज्ञान पीठ सदैव से लोक कल्याण के उद्देश्य से साधकों का शोध परख मार्गदर्शक रहा है ! वर्तमान में अपने नये स्वरूप में पूरे समर्थ के साथ पुन: लोक कल्याण के लिये प्रस्तुत है !

सनातन ज्ञान पीठ का शैव ग्राम ‘सेवा और सह-अस्तित्व’ का अदभुत मॉडल है ! यहाँ प्रत्येक साधक अपनी क्षमता और कौशल से समाज की सेवा करेगा।

यहाँ प्रत्येक साधक को यह सिखाया जायेगा कि समाज सेवा से चलता है न कि धन से ! शिक्षा, चिकित्सा, भोजन, आवास के सभी प्रकल्प नि:शुल्क होंगे ! जिससे व्यक्ति अपना अधिक से अधिक समय का प्रयोग आध्यात्मिक विकास और आत्म कल्याण में कर सके।

साधकों के पास दो विकल्प होंगे

  1. अल्पकालिक स्वयंसेवक साधक जो 2 से 5 वर्ष तक गहन साधना के साथ समाज सेवा कर सकेगा।
  • पूर्णकालिक आजीवन समर्पित साधक।

आर्थिक ढांचा और बुनियादी सुविधाएँ (साझा कोष)

पूर्ण आर्थिक सुरक्षा: जो साधक अपना पूरा जीवन और समय पीठ को देंगे, उनके लिए रोटी, कपड़ा, मकान और चिकित्सा की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी संस्था की होगी।

पीठ के अंदर कोई भी व्यक्तिगत कमाई या निजी संपत्ति के संचयन को कोई व्यवस्था नहीं होगी। जो भी उत्पादन या आय (जैसे जैविक कृषि से, आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण से, या साहित्य प्रकाशन से) होगी, वह पीठ के ‘साझा कोष’ में संगृहीत की जाएगी। वही से सभी के कल्याण के लिये व्यय होगी !

यदि कोई अल्पकालिक साधक 5 साल बाद गृहस्थ जीवन में लौटना चाहता है, तो पीठ उसे एक ‘पुनर्वास निधि’ के साथ विदा करेगी,  जिससे वह साधक नये संस्कारों और जोश के साथ स्वयं को समाज में फिर से स्थापित कर सके।

3. कार्य का वितरण (‘श्रमदान’ की व्यवस्था)

पीठ में साधकों के मध्य शारीरिक और मानसिक श्रम में कोई भेद नहीं होगा। साधक आचार्य और गोशाला में सेवा करने वाला या खेत जोतने वाले साधक दोनों को समान सम्मान दिया जायेगा।

हर सदस्य के लिए सप्ताह में कुछ घंटे ‘शारीरिक श्रमदान’ (जैसे- सफाई, कृषि, भोजनालय में सेवा) देना अनिवार्य होगा ! फिर चाहे उसकी विशेषज्ञता कुछ भी हो।

बैठक में सभी साधकों और स्वयंसेवकों को “प्रबुद्ध समिति” के समक्ष अपनी बात रखने का पूर्ण अधिकार होगा।

शिक्षा और आधुनिक प्रासंगिकता

गहन साधना के साथ संस्थान में आधुनिक कौशल का समावेश भी किया जायेगा ! संस्थान केवल पारंपरिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा। साधकों को आधुनिक तकनीक AI, कोडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, आधुनिक प्रबंधन आदि भी सिखाया जायेगा, ताकि वह सनातन ज्ञान को आज की भाषा में समझ कर पूरी दुनिया तक पहुँचा सकें।

यह पूरा का पूरा इकोसिस्टम साधकों को प्रकृति के सहयोग से तनावमुक्त रख कर सर्वश्रेष्ठ जीवन शैली को प्रस्तुत करेगा प्रदर्शन करेगा ! इस तरह भारत एक बार फिर से ‘ज्ञान और सेवा’ में वैश्विक केंद्र के रूप में मानवता के कल्याण के लिये अपना योगदान देंगा।

विशेष सूचना :-

यदि आप भी इस लोक कल्याण के महाभियान में जुड़ना चाहते हैं तो आप संस्था से डिजिटल फार्म लेकर अवश्य भर दीजिये ! कोई असुविधा होने पर संस्थान के जन संपर्क प्रभारी श्री शिवम् शुक्ला जिनका संपर्क नम्बर – 63933 30597 उनसे वार्ता कर सकते हैं ! कार्यालय में संपर्क कीजिये या या कमेन्ट में अपना नाम व नम्बर दीजिये जिससे हम आपसे संपर्क कर सकें !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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