शैव ग्राम कोई साधारण स्थान नहीं, बल्कि एक पवित्र और उच्च आध्यात्मिक संस्थान है, जहां प्रवेश का मानक केवल बौद्धिक क्षमता नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि और उदारवादी चारित्रिक बल है।
यह अत्यंत खेदजनक है कि इस संस्थान से जुड़ने की इच्छा रखने वाले 2700 प्रत्याशियों में 99% प्रत्याशी अपनी ‘विकृत वृत्ति’ के कारण पहले ही चरण की मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक परिक्षण में विफल हो गए।
उनकी सोच में स्वार्थ, संकीर्णता, लोभ, संग्रह की वृत्ति और दूषित मानसिकता की स्पष्ट रूप से झलक रही थी, जो संस्थान के आदर्शों के सर्वथा विपरीत है।
यह स्पष्ट किया जाता है कि शैव ग्राम की पवित्र भूमि लोभियों, स्वार्थियों और पाखंडियों के लिए बिल्कुल नहीं है। जो लोग अध्यात्म या सेवा का चोला ओढ़कर केवल अपने व्यक्तिगत और भौतिक स्वार्थों की पूर्ति करना चाहते हैं, वह इस संस्थान के योग्य नहीं हैं। शिव का मार्ग वैराग्य, सत्य और निस्वार्थ कर्म का मार्ग है।
संस्थान का मूल उद्देश्य ऐसे समर्पित व्यक्तियों का निर्माण और संगतीकरण है, जिनके हृदय में समाज के प्रति उदारता और परस्पर सहयोग का सच्चा भाव हो। सेवा, समर्पण और परोपकार ही यहां की प्राथमिक शर्ते है।
अतः यह एक स्पष्ट और कड़ी सूचना है कि जिस भी व्यक्ति के भीतर उदारता, सत्यनिष्ठा और निःस्वार्थ सहयोग की भावना का तनिक भी अभाव है, वह कृपया संस्थान से किसी भी प्रकार का संपर्क करने का कष्ट न करे। यहां पाखंड के लिए कोई स्थान नहीं है; केवल निर्मल हृदय वाले, उदारवादी और सेवाभाव रखने वाले साधकों का ही स्वागत है।!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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