लगभग एक वर्ष पूर्व मेरे शिष्य सुशील कुमार जांगिड मुझे अपने निवास स्थान सवाई माधवपुर, राजस्थान भ्रमण के लिये ले गये थे ! जहाँ पर भीड़ भाड़ से दूर, आडम्बर विहीन, राजस्थान की सादगी में मुझे शिव का वैराग्य नजर आया।
फिर ‘शैव ग्राम’ की स्थापना का विचार आते ही मेरी आत्मा ने स्वतः ही राजस्थान की पुण्य भूमि को पुकारा। यह केवल एक स्थान का चुनाव नहीं था, बल्कि एक गहरी भावात्मक अनुभूति थी ! जो भगवान शिव की शैव जीवन शैली के बहुत निकट थी !
यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और अछूता पर्यावरण मन को असीम शांति प्रदान करता है। भोर होते ही जब मोरों की अधिकता के बीच उनकी मधुर केका गूंजती है और उनके रंग-बिरंगे पंख हवा में लहराते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है, मानो प्रकृति स्वयं शिव की आराधना कर रही हो। तपती रेत, घने जंगलों में शेर की दहाड़ के बीच निर्द्वंद पनपता जीवन बहुत अद्भुत है।
सबसे अधिक मुझे यहाँ के लोगों ने प्रभावित किया, वह उनका मर्यादित, मिलनसार स्वभाव है, उनकी निश्छल मुस्कान सीधे हृदय को छूती है। चूल्हे पर सिकी बाजरे की रोटी और छाछ जैसे सादे भोजन में जो अपनत्व और तृप्ति है, वह दुनिया के किसी छप्पन भोग में नहीं है।
यहाँ के कण-कण में बसा अगाध जीव प्रेम ! चाहे वह गोमाता की निस्वार्थ सेवा हो या तपती दोपहर में पक्षियों के लिए पानी खाना रखना हो, यह सिद्ध करता है कि यहाँ के लोग हर जीव में ईश्वर देखते हैं।
इन्हीं भावनाओं के वशीभूत होकर, सादगी, प्रेम और प्रकृति के इस पवित्र संगम के कारण राजस्थान को मैंने अपने ‘शैव ग्राम’ के लिए चुना, ताकि यहाँ आकर हर व्यक्ति शिवत्व की अनुभूति के साथ शांति का अनुभव भी कर सके !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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मोबाईल : 9453092553

