आज धर्म के नाम पर पाखंड और व्यवसाय का धंधा जोरों पर है। कुछ तथाकथित ‘धूर्त धर्म गुरु’ भगवा पहन कर लोगों की आस्था, डर और मजबूरियों का फायदा उठाकर उनका भावनात्मक और आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
जब कोई व्यक्ति संकट में होता है, तो वह अंधविश्वास के जाल में फंस जाता है। अंत में उसे मानसिक शांति तो दूर, केवल ठगा हुआ अहसास और खाली हाथ मिलते हैं। धर्म का वास्तविक उद्देश्य जोड़ना है, लूटना नहीं।
इसलिये किसी धर्म गुरु के चक्कर में मत पड़िये, बल्कि आपकी सुविधा और विचार धारा के अनुसार धार्मिक परिवार या सामाजिक समूह का हिस्सा बनिये !
एक सच्चा धार्मिक समुदाय आपके जीवन में बहुत से सकारात्मक बदलाव लाता है ! यह समूह आपसी सद्भाव और सेवा भावना से जुड़ा होता है। इसलिये यह परिवार जीवन भर आपका सहायक और मार्गदर्शक बना रहता है !
जब भी आप किसी संकट में होते हैं, तो कोई टीवी पर बैठने वाला धर्म गुरु आपके घर नहीं आयेगा और न ही बिना पैसे लिये आपसे बात करेगा। इसकी जगह जब आप आपकी विचारधारा के अनुरूप धार्मिक परिवार का हिस्सा बनते हैं, तो वह आपके हर सुख-दुःख में आपके कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होगा।
जहाँ दिखावा नहीं होता है, बल्कि सच्चा अपनत्व और मानसिक संबल मिलता है।
याद रखिये ईश्वर हमारे भीतर और समाज की सेवा में है, किसी के आलीशान आश्रम या महंगे अनुष्ठानों में नहीं है।
इसलिए, धर्म के व्यवसायियों की ‘दुकानदारी’ को पहचानें, उनसे दूरी बनाएं और एक ऐसे जागरूक समाज का निर्माण करें, जहाँ आपसी भाईचारे और नि:स्वार्थ सेवा को प्राथमिकता दी जाती हो। यही धर्म का सही अनुकरण है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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