तुम्हारी प्राण ऊर्जा ही ईश्वर है

शैव जीवन दर्शन के अनुसार मनुष्य की प्राण ऊर्जा ही ईश्वर है, जिस हम वृत्ति के आवेग में देख नहीं पा रहे हैं, शैव दर्शन कहता है, ईश्वर को पाने के लिए कहीं मत भटकिये, बस सबसे पहले अपने प्राण ऊर्जा को पहचानो !

इस सनातन दर्शन का समर्थन उपनिषदों ने भी किया है, उनके अनुसार ईश्वर कोई दूर आकाश में बैठा स्वरूप नहीं है, बल्कि वह हमारा ‘महाप्राण’ स्वरूप है, जो सृष्टि के कण-कण को और हमारे शरीर को जीवंत कर रहा है।

छांदोग्य उपनिषद में स्पष्ट उद्घोष है कि “प्राणो ब्रह्मेति” अर्थात प्राण ही ब्रह्म है। हमारे भीतर जो श्वास चल रही है और जो चेतना जाग्रत है, वह केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं है बल्कि वह उसी अनंत परमात्मा का स्पंदन स्वरूप है। प्राण ऊर्जा की अनुभूति ही वह दिव्य सूत्र है, जो देह को आत्मा से और आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है।

“ईश्वर पहले से ही प्रकट हैं, बस तुम उन्हें अपने वृत्ति के आवेग में अहंकार वश पहचान नहीं पा रहे हो, और माया क्षेत्र में भटक रहे हो” यह कथन सनातन शैव जीवन दर्शन का आधार है, जिसे अद्वैत वेदांत विचारकों ने भी स्वीकार किया है।

इसलिये ईश्वर को पाने के लिये कहीं मत भटको, बस अपने अहंकार को त्याग कर प्रकृति की सेवा करो, वह तुम्हें तुम्हारे कार्यों में ही ईश्वर का दर्शन करवा देगी !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

शैव ज्ञान के लिये संस्थान की कक्षा से जुड़िये

मोबाईल : 9453092553

Share your love
yogeshmishralaw
yogeshmishralaw
Articles: 2493

Newsletter Updates

Enter your email address below and subscribe to our newsletter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *