मानव मन जब तथाकथित धर्म के कपोलकल्पित रहस्यों और मृत्यु के पार की अनिश्चितताओं से घिर जाता है, तो वह ‘अज्ञात भय’ से भयभीत हो जाता है !
यही काल्पनिक अज्ञात भय जब व्यक्ति के विश्वास और मनोभाव पर हावी हो जाता है, तो वह व्यक्ति ‘धार्मिक अवसाद’ में चला जाता है। जिसका किसी भी पैथी में कोई भी समाधान नहीं है !
धार्मिक अवसाद मुख्य रूप से ईश्वर के दंडित करने वाले स्वरूप की अति रक्त रंजित वीभत्स मानसिक कल्पना है, जो पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक के विकृत विश्लेषण से उपजती है। जब कोई व्यक्ति यह मानने लगता है कि उसने अपने किसी छोटे से कृत्य या विचार से ईश्वर को रुष्ट कर दिया, तो उसका मन निरंतर धार्मिक अपराध बोध में फंस जाता है।
जो जीवन की सार्थकता को नश्वरता और मृत्यु के अज्ञात स्वरूप को मन के गहरे नकारात्मक भाव से जोड़ देता है। यह नकरात्मता मनुष्य को उस अवसाद के गर्त में जकड़ लेती है, तब धर्म उसे मानसिक शांति देने के बजाय एक भारी आत्मग्लानी का बोझ लगने लगता है।
इस धार्मिक अवसाद अर्थात अज्ञात भय-आधारित कर्मकांडों से मुक्ति हमें एक मात्र शैव जीवन दर्शन ही दे सकता है !
किसी भी अज्ञात भय से डरने के बजाय उसके परम सत्य को जानने के लिये शैव ग्राम आइये। यही अवसर मनुष्य को धार्मिक अवसाद के अंधकार से निकालकर परम आनंद और आत्मिक शांति की ओर ले जाता है।!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
शैव ज्ञान के लिये संस्थान की कक्षा से जुड़िये
मोबाईल : 9453092553

