शैवों को किसी कल्कि अवतार की जरुरत नहीं है

जब समाज में जब शासक कमज़ोर और अयोग्य होते हैं, तो जनता के विद्रोह को शांत करने के लिए वैष्णव धर्म गुरु ‘भविष्य के मसीहा’ या ‘अवतारवाद का सहारा’ लेते हैं। जो कि पूर्ण सुनी सुनाई कपोल कल्पित कल्पना है !

कल्कि अवतार के इंतजार में मत बैठो, कल्कि बस सिर्फ वैष्णव का फैलाया गया प्रपंच है ! ‘कल्कि अवतार’ की प्रतीक्षा समाज को भाग्यवादी और निष्क्रिय बनाती है।

इसके विपरीत, शैव जीवन दर्शन ‘प्रतीक्षा’ में नहीं, बल्कि बुराई के तत्काल विनाश और कर्म पर बल देता है। शिव का प्रतीक हमें अन्याय के खिलाफ खड़ा होना सिखाता है, न कि किसी वैष्णव चमत्कार के इंतज़ार में मौन रहना।

वर्तमान में भारत की दो सबसे बड़ी समस्याएं हैं !  भ्रष्टाचार और त्वरित न्याय का अभाव। जब न्याय मिलने में दशकों लग जाते हैं, तो भ्रष्टाचारियों और अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता है, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।

राजनीतिज्ञ और प्रशासनिक अधिकारीयों की जवाबदेही न होना ही बेरोजगारी, पेपर लीक और महंगाई जैसी समस्याओं का कारण है।

शैवों का मानना है कि इन सांसारिक समस्याओं को सुलझाने के लिए किसी ‘कल्कि’ की कोई आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का समाधान एक ईमानदार, दूरदर्शी और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला नेतृत्व कर सकता है।

जब देश में पारदर्शी नीतियां लागू होंगी, भ्रष्टाचार पर कठोर प्रहार होगा और हर नागरिक को समय पर न्याय मिलेता है, तो देश की सभी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।

ऐसे मौके इतिहास में कई बार आये हैं, जिन्हें जिम्मेदार शासकों ने पूरी ईमानदारी से नियंत्रित किया है ! तभी आज भारत भारत है ! उन जिम्मेदार शासकों ने कभी किसी कल्कि का इंतजार नहीं किया !

इसलिये हमें किसी अवतार के प्रपंच में उलझने की जरुरत नहीं है, बल्कि एक सशक्त और जवाबदेह शासन व्यवस्था को सक्रीय करने की आवश्यकता है, बस !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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