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सुपर अल नीनो अति प्राचीन काल से मानवीय षड्यंत्र का हिस्सा है ! जिसे कृषि आधारित विकासशील देशों को नष्ट करने के लिए हथियार के तौर पर प्रयोग किया जाता रहा है !
जब-जब किसी विकासशील देश की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से अच्छी तरह से विकसित होती है, तब तब आदि काल से वायुमंडल में परिवर्तन की क्षद्म विद्या का प्रयोग करके उस भूखण्ड के विकास को बाधित किया जाता रहा है !
इसके प्रभाव से वायुमंडल के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण गर्मी लंबी खिंचती है ! प्रभावित भूखण्ड के कई हिस्सों में गंभीर जल संकट और पीने के पानी की समस्या पैदा हो जाती है। जहाँ एक ओर सूखा पड़ता है, वहीं दूसरी ओर तटीय क्षेत्रों (जैसे चेन्नई या आंध्र प्रदेश के तट) में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। समाज इन्हें प्राकृतिक आपदा समझता है, किन्तु यह लम्बे समय से प्रायोजित वैश्विक षडयंत्र का हिस्सा होता है !
हमारे शास्त्रों में भी इससे भी भयावह घटनाओं का निवारण बतलाया गया है ! जैसे सनातन ग्रंथों में प्रायः 12 वर्ष के अकाल (द्वादश वर्षीय दुर्भिक्ष) का उल्लेख कई जगह मिलता है, जो एक अत्यंत भयंकर सूखा होता था।
यह मान्यता थी कि जब जब धर्महीन राजा सिंहासन पर बैठता है, तब तब दुर्भिक्ष पड़ता है ! यहाँ धर्महीन राजा से तात्पर्य आव्यवहरिक दृष्टि रखने वाले, भोगी विलासी, अपने मित्रों को अनुचित लाभ देने वाले राजा से है !
जब राजा के मित्र, राजा की शह पर राजकोषों को लूटने के लिये अव्यवहारिक विकास करते हैं, तब दुर्भिक्ष पड़ता है !
राजा रोमपाद, महाराज शांतनु, महाराज पृथु, राजा सत्यव्रत, आदि जैसे विलासी राजा इसका उदहारण है !
राष्ट्र के इस विपत्ति काल में जंगलों में रहने वाले शैव तपस्वियों ने इन शासकों को धर्म पालन करने को बाध्य किया था ! जिसके प्रभाव में उन्हें नैतिक और प्रशासनिक सुधार करने पड़े !
ऋष्यश्रृंग, देवापि, अगस्त जैसे महर्षियों से आध्यात्मिक व वैज्ञानिक परामर्श देकर तत्कालीन राजाओं की कार्य नीतियों में परिवर्तन करवाया ! महाराज पृथु ने तो कृषि भूमि सुधार और जल प्रबंधन पर बहुत विस्तृत कार्य किया और दुर्भिक्ष से मुक्ति पायी।
कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी देश का राजा जब विवेकहीन होकर अपने लोभी मित्रों को खुश करने के लिये कार्य करता है, तब तब उस देश को “सुपर अल नीनो” जैसे प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ता है !
इतिहास गवाह है “सुपर अल नीनो” जब जब आया है तब तब उसके प्रभाव से उन राज्यों में 30% से अधिक जीव जंतु, पशु पक्षी, मनुष्य को मौत हो गयी है और 70% से अधिक वनस्पति नष्ट हो गयी है ! जिसे सामान्य होने में 5 से 7 वर्ष का समय लगता है !
और इसका समाधान बस सिर्फ जंगलों में रहने वाले “तुलसी गौड़ा” जैसे शैव साधकों के पास है ! जो राष्ट्रपति के आग्रह पर बिना चप्पल पहने ही एक वस्त्र में राज भवन पहुँच गयी !
हमारे देश में ऐसे जाने अनजाने शैव जीवन शैली का अनुगमन करने वाले सैकड़ों महर्षि आज भी आदिवासी जंगलों में पड़े हैं, जो हमें शिव के बतलाये हुये सिद्धान्तों को अपना कर हमें इस समस्या से मुक्त कर सकते हैं !
बस आवश्यकता है राजा को अपना विवेक जाग्रत करने की और उनके बतलाये हुये मार्ग को अपनाने की !
अन्यथा यह देश 50 वर्ष पीछे चला जायेगा !!
श्री शिवम् शुक्ला
जन संपर्क प्रभारी, शैव ग्राम
संपर्क – 63933 30597
