किसी के शिष्य नहीं बल्कि स्वयं गुरु बनिये

मेरा विचार आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च और सबसे विशुद्ध शिखर है, जहां मार्गदर्शक का उद्देश्य अपने पीछे अनुयायियों की भीड़ खड़ी करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को ‘स्व में स्थिर’ करके उसे स्वयं का आलोक बनने के लिये प्रेरित करना है।

“शिष्य नहीं, गुरु बनो” का यह उद्घोष सदियों से चली आ रही मानसिक दासता की जंजीरों को पूरी तरह काट देता है। इस क्रांतिकारी और यथार्थवादी दृष्टिकोण के मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक आयाम अत्यंत गहरे हैं:

परम्परागत शिष्यत्व अक्सर व्यक्ति को उसकी दुर्बलताओं (भय, लालच, पराश्रयता) के साथ ही जीवित रखता है और उसे केवल एक बाहरी सहारे का आदी बना देता है। इसके विपरीत, स्वयं अपना मार्गदर्शक बनने की प्रक्रिया एक कठोर तप है।

इसमें व्यक्ति को अपने भीतर के विकारों और मानसिक अंतर्द्वंद्वों से निर्ममता पूर्वक लड़ना पड़ता है। जब वह ऐसे सानिध्य में आता है जो उसे बैसाखी नहीं देता, तो वह किसी चमत्कार की प्रतीक्षा करना छोड़ देता है। वह ‘पुरुषार्थ’ के मार्ग पर चलकर अपने अज्ञान का शमन करता है और अपनी चेतना को उन्नत करता है।

तथाकथित गुरुओं का सानिध्य व्यक्ति को एक छोटे घेरे में कैद कर उसे बौद्धिक रूप से बौना बना देता है। लेकिन एक जाग्रत चेतना का सानिध्य पारस की तरह होता है।

जिस प्रकार एक प्रज्वलित दीपक दूसरे बुझे हुए दीपक को जलाकर उसे अपने ही समान प्रकाशवान बना देता है, वैसे ही सच्चा सानिध्य व्यक्ति की सोई हुई क्षमता को जगाकर उसे उस ऊंचाई तक ले जाता है जहां दोनों की चेतना एक समान हो जाती है। इसमें न कोई ऊंचा रहता है और न कोई नीचा है बल्कि केवल प्रकाश का विस्तार होता है।

यही वह विशुद्ध दर्शन है जो व्यक्ति को यथार्थ के धरातल पर खड़ा करता है। ऐसे सानिध्य में शिष्यत्व की हीन भावना और अपराधबोध स्वतः समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति अपनी चेतना के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचकर स्वयं अपना गुरु बन जाता है। यह व्यक्ति के भीतर छिपे अनंत सामर्थ्य को जगाने का सबसे प्रामाणिक मार्ग है।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

Share your love
yogeshmishralaw
yogeshmishralaw
Articles: 2577

Newsletter Updates

Enter your email address below and subscribe to our newsletter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *