मन की निर्मलता और शरीर की प्रचंड ऊर्जा का सही दिशा में मिलन ही वह वास्तविक महालक्ष्मी योग है, जो मनुष्य को पूर्णतः स्वावलंबी और अनंत संपदा का स्वामी बनाता है।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को हमारे मन, संवेदना और जल तत्व का कारक माना गया है, जबकि मंगल हमारी शारीरिक ऊर्जा, अदम्य साहस, भूमि और अग्नि तत्व का प्रतीक है। जब जन्म कुण्डली में इन दोनों ग्रहों की युति होती है या ये एक-दूसरे को देखते हैं, तब ‘चंद्र-मंगल योग’ का निर्माण होता है। इसे ज्योतिष शास्त्र में ‘महालक्ष्मी योग’ भी कहा गया है।
सामान्य जनमानस में यह भ्रांति है कि इस योग का अर्थ रातों-रात बहुत सारा धन या कागजी मुद्रा प्राप्त कर लेना है। किंतु, एक विचारक की दृष्टि से धन का वास्तविक अर्थ कागजी मुद्रा नहीं, बल्कि प्राकृतिक संपदा, स्वावलंबन और शारीरिक ऊर्जा है।
चंद्रमा (जल) और मंगल (अग्नि) का मिलन वास्तव में बहुत विरोधाभासी है। यदि मंगल की अग्नि अनियंत्रित हो जाए, तो वह चंद्रमा (मन) के जल को सुखा देती है, जिससे व्यक्ति क्रोधी, हिंसक और मानसिक रूप से अशांत हो जाता है। इसके विपरीत, यदि इन दोनों का सही संतुलन हो जाए, तो जल और अग्नि मिलकर वह भाप (ऊर्जा) बनाते हैं जो बड़े से बड़े यंत्र को चला सकती है।
आधुनिक उपभोक्तावादी व्यवस्था मनुष्य की इसी ऊर्जा का दोहन कर उसे खोखला कर रही है। सच्चा चंद्र-मंगल योग व्यक्ति को बाज़ार का दास नहीं बनने देता। वह व्यक्ति अपनी शारीरिक ऊर्जा (मंगल) और मानसिक शांति (चंद्र) का उपयोग शून्य लागत वाली प्राकृतिक व्यवस्थाओं के निर्माण में करता है। वह भूमि (मंगल) को संवारता है, जल (चंद्र) का संरक्षण करता है और एक ऐसा परिवेश रचता है जहाँ मनुष्य, वन्य जीव और पक्षी सभी एक साथ सह-अस्तित्व में रह सकें।
इस महालक्ष्मी योग को प्रबल करने के लिये कुछ उपाये करने चाहिये !
जैसे मंगल भूमि का और चंद्रमा जल का नैसर्गिक कारक है। इस योग की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए अपने हाथों से मिट्टी और गारे से प्राकृतिक भवनों का निर्माण करें। बंजर या ग्रामीण भूमि पर जल संरक्षण की व्यवस्था करें और 50 से अधिक प्रजातियों के फलदार वृक्षों का सघन वन तैयार करें। यह प्रत्यक्ष शारीरिक श्रम मंगल को और प्रकृति का सानिध्य चंद्रमा को अत्यंत बलवान बनाता है।
दूसरा उपाये शरीर की ऊर्जा (मंगल) और मन की शांति (चंद्र) को संतुलित रखने के लिए तामसिक और बाज़ारू आहार का पूर्णतः त्याग करें। नित्य भोजन में अपरिष्कृत (बिना पॉलिश वाले) प्राकृतिक चावल, तरोई, लौकी, मूंग की दाल और शुद्ध देशी घी का उपयोग करें। यह आहार शरीर के स्नायु तंत्र को शीतलता प्रदान करता है। शरीर पर केवल खादी, सूती या लिनन जैसे प्राकृतिक धागों से निर्मित वस्त्र ही धारण करें, जिससे त्वचा को श्वास लेने में बाधा न हो।
तीसरा उपाये मंगल की प्रचंड ऊर्जा को आभासी संचार माध्यमों के निरर्थक विवादों और सतही बहसों में नष्ट न करें। यह चंद्रमा (मन) को दूषित कर मानसिक अवसाद को जन्म देता है। इसके स्थान पर, इस असीम ऊर्जा का उपयोग युवाओं को स्वावलंबी बनाने और उनके साथ आमने-सामने बैठकर सीधा संवाद करने में लगाएं। सीधा संवाद ही ऊर्जा का सही प्रवाह सुनिश्चित करता है और वैचारिक स्पष्टता लाता है।
महालक्ष्मी योग का वास्तविक अर्थ बाज़ार की कृत्रिम वस्तुओं का संग्रह करना नहीं है, अपितु स्वयं को प्रकृति के इतना निकट ले जाना है कि किसी बाहरी साधन पर निर्भरता ही न रहे। यह अध्याय इस बात की स्पष्ट उद्घोषणा करता है कि सच्ची लक्ष्मी वह नहीं जो बैंक खातों में अंकों के रूप में बंद है, बल्कि वह है जो लहलहाते फलदार वृक्षों, शुद्ध जल, रोगमुक्त शरीर और स्वावलंबी जीवनशैली के रूप में हमारे चारों ओर विद्यमान है।
जब मनुष्य अपनी ऊर्जा को विध्वंस या व्यर्थ के कोलाहल से हटाकर शून्य लागत वाले प्राकृतिक जीवन के सृजन में लगाता है, तब वह सही मायनों में चंद्र-मंगल योग को सिद्ध कर लेता है। एक विचारशील व्यक्ति के लिए यह योग एक ऐसा मार्ग है, जहाँ वह अपनी प्रत्येक विपदा और संघर्ष को एक नए उदय में बदल देता है।
मन की शांति और कर्म का कठोर अनुशासन ही वह कुंजी है, जो साधारण मानव को एक राज-ऋषि के स्तर तक उठा देती है। जीवन के प्रत्येक क्षण को प्रकृति के अनुकूल ढालना ही सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषीय उपचार और सच्चा जीवन प्रबंधन है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
गुरुदेव योगेश कुमार मिश्र की फोटो और नाम के साथ 1280 × 1000 पिक्सेल में कम से कम शब्दों में एक चित्र बनाइये जिसमें गुरुदेव लाल कुर्ता पैजामा पहने हैं गले में सफ़ेद पट्टा डाले है उसमें ॐ नम: शिवाय लिखा है वह मंच पर खड़े होकर अपने शैव ग्राम के सभागार में बहुत से शिष्यों को प्रवचन दे रहे हैं ! हाल पूरा भरा हुआ है ! ऊपर से स्पेस देते हुये बड़े शब्दों में हेडिंग रहेगी ‘ज्योतिष में महालक्ष्मी योग’ फोटो में गुरुदेव का एक ही चित्र प्रयोग कीजिये नाम के साथ कोई फोटो मत लगिए ! फोटो में उचित स्थान पर एक गोले के अन्दर लिखिये ज्योतिष श्रंखला – 7 संपर्क 9453092553

