ज्ञान, सौंदर्य और कर्मठता का ग्रह योग

ज्ञान जब आचरण में ढलता है, सौंदर्य जब प्रकृति का आदर करता है और कर्म जब स्वावलंबन का सृजन करता है, तब मनुष्य सही अर्थों में एक महापुरुष कहलाता है।

वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति, दैत्यगुरु शुक्र और कर्मफल दाता शनि से बनने वाले तीन अत्यंत शक्तिशाली योगों का वर्णन है। जब बृहस्पति कुण्डली के केंद्र भावों (1, 4, 7, 10) में अपनी स्वराशि या उच्च राशि में होता है, तो ‘हंस योग’ बनता है। इसी प्रकार शुक्र से ‘मालव्य योग’ और शनि से ‘शश योग’ का निर्माण होता है। ये तीनों योग मनुष्य को भीड़ की मानसिकता से निकालकर एक स्वतंत्र विचारक और युग-प्रवर्तक बना देते हैं।

हंस योग मनुष्य को मात्र किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि उसे एक ‘राज-ऋषि’ के रूप में स्थापित करता है। ऐसा व्यक्ति अंधी दौड़ और कृत्रिम व्यवस्था का विरोध करता है। वह अपने जीवन के गहरे अनुभवों से ऐसी विचारधारा को जन्म देता है, जो समाज के लिए मार्गदर्शक बनती है। मालव्य योग को प्रायः लोग भौतिक विलासिता से जोड़ते हैं, किंतु यथार्थ में यह प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य का प्रतीक है। सच्चा मालव्य योग मनुष्य को कृत्रिम उपभोग से दूर ले जाकर प्राकृतिक वस्तुओं से प्रेम करना सिखाता है।

वहीं, शश योग निरंतर, अनुशासित और निस्वार्थ कर्म का परिचायक है। यह योग वातानुकूलित कक्षों में बैठने के बजाय, कठोर परिश्रम से मिट्टी को आकार देने का साहस देता है। जब किसी व्यक्ति के जीवन में इन योगों का प्रभाव होता है, तो वह केवल अपने नगर या राज्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी दृष्टि संपूर्ण राष्ट्र और विश्व के कल्याण पर होती है। वह शून्य लागत वाली प्राकृतिक व्यवस्थाओं का निर्माण कर पूरे विश्व के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।

जब मनुष्य अपने गुरु (ज्ञान) से एक श्रेष्ठ दर्शन गढ़ता है, अपने शुक्र (सौंदर्य) से प्रकृति को संवारता है, और अपने शनि (कर्म) से मिट्टी के घरौंदों में भी असीम शांति का निर्माण करता है, तब वह साधारण मानव नहीं रहता। वह एक विचारक बन जाता है, जो अपने ज्ञानपीठ से ऐसे विचारों का सृजन करता है, जो आने वाली पीढ़ियों का पथ प्रशस्त करते हैं। अपनी दुर्बलताओं को अपनी शक्ति में बदलकर, प्रकृति के नियमों के अधीन रहते हुए एक राज-ऋषि की भांति जीवन जीना ही ज्योतिष शास्त्र का अंतिम और सर्वोच्च लक्ष्य है।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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मोबाईल : 9453092553

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