युवाओं से अपील
वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहां भू-राजनीतिक तनाव, संरक्षणवाद और उच्च ब्याज दरों ने निवेश के पारंपरिक नियमों को बदल कर रख दिया है।
वहीं, भारत के घरेलू मोर्चे पर हालिया राजनीतिक बदलावों और गठबंधन की राजनीति ने निवेशकों के मन में नीतिगत निरंतरता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऐसे में, यदि आप अगले पांच वर्षों के लिए किसी नए व्यापार या अचल संपत्ति (रियल एस्टेट) में अपनी पूंजी लगाने का विचार कर रहे हैं, तो जोखिम और प्रतिफल के नए समीकरणों को समझना बेहद जरूरी है।
दुनिया भर में ‘सस्ते कर्ज’ का युग अब समाप्त हो चुका है। अमेरिका और यूरोप जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अपने स्थानीय उद्योगों को बचाने के लिए कड़े टैरिफ और नीतियां लागू कर रही हैं। इसके साथ ही, मध्य पूर्व और यूरोप में जारी संघर्षों ने ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की लागत को अप्रत्याशित बना दिया है।
घरेलू स्तर पर देखें तो, भारत में लोकलुभावन योजनाओं पर बढ़ता जोर राज्यों के पूंजीगत व्यय को सीमित कर सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर (हाईवे, पोर्ट्स), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली बुनियादी आर्थिक नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है। यह विरोधाभासी स्थिति निवेशकों से एक बेहद संतुलित दृष्टिकोण की मांग करती है।
अगले पांच सालों में नया उद्यम शुरू करना साहस का काम है, लेकिन यह पूरी तरह घाटे का सौदा नहीं है, बशर्ते क्षेत्र का चुनाव सही हो। मौजूदा समय में बैंक ऋण महंगा है, इसलिए अत्यधिक कर्ज लेकर शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स पर शुरुआत से ही भारी वित्तीय दबाव रहेगा।
निर्यात पर अत्यधिक निर्भर व्यवसायों को वैश्विक मंदी और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत, जो व्यवसाय भारत की विशाल घरेलू आबादी की जरूरतों को पूरा करते हैं या आयात प्रतिस्थापन पर केंद्रित हैं, वे अधिक सुरक्षित रहेंगे।
इसके अलावा, जीएसटी और डिजिटल अनुपालन के इस दौर में अनौपचारिक तरीके से व्यापार करना अब संभव नहीं है, इसलिए किसी भी नए व्यापार में पर्याप्त ‘वर्किंग कैपिटल’ (कार्यशील पूंजी) का होना पहली शर्त बन गई है।
भारतीय मानसिकता में जमीन या मकान खरीदना हमेशा से सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। मुद्रास्फीति से बचने के लिए यह आज भी एक कारगर उपाय है, लेकिन अगले पांच वर्षों के लिए रणनीति बदलनी होगी।
टियर-1 और टियर-2 शहरों में आवासीय संपत्तियों की कीमतें हाल के वर्षों में अपने उच्चतम स्तर को छू चुकी हैं। ऐसे में अल्पकालिक मुनाफे के लिए प्रॉपर्टी में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
इसके उलट, देश में बढ़ते ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण कमर्शियल रियल एस्टेट, वेयरहाउसिंग और डेटा सेंटर्स में निवेश अधिक स्थिर और लाभदायक साबित हो सकता है। यहां सबसे बड़ा जोखिम ‘तरलता’ का है।
आर्थिक संकट के समय अचल संपत्ति को तुरंत नकदी में बदलना सबसे मुश्किल होता है, इसलिए अपनी कुल संपत्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ प्रॉपर्टी में फंसा देना समझदारी नहीं होगी।
अनिश्चितताओं के डर से पूंजी को तिजोरी में बंद रखना भी घाटे का ही सौदा है, क्योंकि महंगाई आपकी पूंजी का मूल्य लगातार कम कर रही है। इस दौर में आक्रामक सट्टेबाजी के बजाय पूंजी संरक्षण पर ध्यान देना होगा।
किसी भी नए प्रोजेक्ट या संपत्ति में एकमुश्त निवेश करने के बजाय, बाज़ार के रुख को देखते हुए किश्तों में पैसा लगाएं। अपने व्यवसाय में कर्ज का बोझ कम से कम रखें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी आप टिके रह सकें।
विशेष बात जो ध्यान देने योग्य है जोखिम को संतुलित करने के लिए अपनी कुल पूंजी का एक हिस्सा सोने या लिक्विड फंड्स जैसी सुरक्षित जगहों पर भी रखें।
अर्थात आने वाले 5 साल निवेश रोकने के नहीं, बल्कि अधिक सतर्क और जागरुक निवेशक बनने के हैं।
यदि आप कर्ज को नियंत्रित रखते हुए, भारत की मजबूत घरेलू मांग और बुनियादी ढांचे के विकास को आधार बनाकर निवेश करते हैं, तो यह अस्थिरता भी आपके लिए लंबी अवधि के मुनाफे का एक मजबूत आधार बन सकती है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553

