बाजारवाद से प्रेरित वर्तमान ‘मोटिवेशनल उद्योग’ आज भारतीय युवाओं में ऊर्जा के बजाय गहरा अवसाद पैदा कर रहा है। रातों-रात सफलता के जो झूठे सपने मंच से बेचे जा रहे हैं, वह युवाओं को हताशा के ऐसे अंधेरे में धकेल रहे हैं, जहां कई बार वे आत्महत्या जैसा चरम और त्रासद कदम उठा लेते हैं।
युवाओं को यह समझना होगा कि किसी मंच से गढ़े गए अवास्तविक पैमाने पर खरा न उतर पाना जीवन की विफलता नहीं है। इन तथाकथित गुरुओं के छलावे और उनके बेचे गए कृत्रिम सपनों के चक्कर में आकर अपने बहुमूल्य जीवन को कभी समाप्त मत करो।
इस उद्योग का सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जो वक्ता मंच से सफलता के अचूक फॉर्मूले बांटते हैं, वे स्वयं कोई वास्तविक फैक्ट्री या उद्योग सफलतापूर्वक नहीं चला पाते। एक वास्तविक धंधा चलाने में कच्चा माल, श्रमिक प्रबंधन और नीतियों की जमीनी माथापच्ची शामिल होती है।
इन वक्ताओं का व्यवसाय केवल बिना किसी जोखिम के ‘उम्मीदें’ बेचना है। असली उद्यमिता में व्यक्ति का जीवन और पूंजी दांव पर लगती है, जबकि मंच से बिना किसी जिम्मेदारी के केवल शब्द परोसे जाते हैं।
ये वक्ता अक्सर पश्चिमी सफलताओं के ऐसे आयातित मॉडल पेश करते हैं, जो भारतीय परिवेश में पूरी तरह बेमानी हैं। पश्चिमी देशों में असफलता पर एक मजबूत ‘सोशल सिक्योरिटी’ का कवच होता है, जबकि भारत में एक युवा की विफलता उसके पूरे परिवार के अस्तित्व को संकट में डाल देती है।
विदेशी मॉडल घोर व्यक्तिवाद पर आधारित हैं, जबकि भारत का सामाजिक ताना-बाना सामुदायिकता और परिवार के प्रति दायित्वों पर टिका है।
जब युवा इन खोखले सपनों को लेकर यथार्थ के धरातल पर उतरता है, तो भारी ‘संज्ञानात्मक असंगति’ का शिकार होता है। जब परिणाम वादों से मेल नहीं खाते, तो वह व्यवस्था को समझने के बजाय स्वयं को अयोग्य मान बैठता है और यही निराशा आत्महत्या का कारण बनती है। लेकिन जीवन आपदाओं से हार मानकर समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उन चुनौतियों से जूझकर उदय होने के लिए है।
भारत के युवाओं को मोटिवेशनल स्पीकर के शब्दों के आडंबर की नहीं, बल्कि ठोस तकनीकी शिक्षा, व्यावहारिक कौशल और स्वावलंबन की आवश्यकता है। केवल बातें करने से संसार नहीं बदलता, धरातल पर उतरकर निर्माण करना पड़ता है।
सच्चा पुरुषार्थ और नेतृत्व वास्तविक कर्म से सिद्ध होता है, खोखले भाषणों से नहीं। अपनी जड़ों और यथार्थ से जुड़े रहें, और किसी और के रचे गए भ्रम के लिए अपने को नाकारा मान कर अपने जीवन को किसी और के उकसाने पर कभी दांव पर न लगाएं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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