मेरे एक मित्र प्रोफेसर ने एक घटना बतलाई, उनके कोई मित्र का बेटा अमेरिका में नौकरी करने गया ! 2 साल के बाद उनको अचानक हार्ट अटैक पड़ गया ! तबीयत ज्यादा खराब हो गई ! मां ने बेटे को फोन किया ! बेटे ने कहा इस समय तत्काल में हवाई जहाज का टिकट लेना बहुत महंगा पड़ेगा ! मैं मौका देखकर आऊंगा !
मां ने तुरंत फोन पिता को दिया ! पिता ने बेटे से कहा कि तू अमेरिका पैसा कमाने गया है और अगर तुझे अपने बाप के दुख दर्द के लिए महंगा सस्ता देखना पड़ रहा है, तो तू नौकरी छोड़कर वापस आ जा क्योंकि दो वक्त की रोटी तो घर पर भी मिलेगी ही, अगर तूने 2 साल में पैसा कमाया है, तो कितना भी महंगा टिकट हो लेकर तुरंत आ जा !
और अगर तूने पैसा नहीं कमाया है नौकरी छोड़ कर तुरंत वापस आ ! क्योंकि उस नौकरी का क्या फायदा जो उस मां-बाप से मिलने के लिए भी तुझे महंगा सस्ता टिकट देखना पड़े, जिन्होंने तुझे पढ़ाने और अमेरिका भेजने में कभी महंगा सस्ता नहीं देखा ! आज तू उसके दुःख में महंगा सस्ता देख रहा है !
बेटा मैने अपने सुख के लिये पैदा किया था और पढ़ाया था न कि अमेरिका की गुलामी करने के लिये !
इसके बाद बेटा तत्काल टिकट लेकर 2 दिन में भारत माता-पिता के पास पहुंच गया !
तब मेरे प्रोफेसर मित्र ने उनके पिता से कहा इस तरह दबाव बनाने की क्या जरूरत थी !
तब उन्होंने जवाब दिया “बेटे को बेटा बनाना पड़ता है” अगर हम उसके महंगे सस्ते के प्रभाव में आ जाते तो संबंध जीवन भर के लिए पैसों से तौले जाते ! और लगता दूरी बढ़ती चली जाती !
इसलिए अगर वक्त पर कोई भी बेटा बेटी, मां बहन, पिता काम न आये तो उस संबंधों को अनावश्यक ढ़ोने से कोई फायदा नहीं है ! जब संबंधों की आत्मा ही मर गयी है तो वह सम्बन्ध बस औपचारिकता की लाश हैं ! जिनसे स्वार्थ और घृणा की बदबू ही आयेगी !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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